तीन दिन से प्रसूताएं थीं भूखी, भोजन ‘खा’ रहा था ठेकेदार
मरीजों ने कहा-भोजन नहीं तो ठेका नहीं, शिकायत पर डीएम ने उठाया था बड़ा कदम
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। महिला अस्पताल में भोजन ठेका निरस्त होने के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्टाफ की अंदरूनी हलचल पर गौर करें तो कुछ कर्मचारियों ने इसे सही ठहराया है, उन्होंने ठेकेदार की ही पोल खोली है। कहा है कि जब मरीजों को दूध और अंडा नहीं दोगे तो भोजन का ठेका निरस्त होगा ही। पिछले तीन दिन से प्रसूताओं को भोजन नहीं दिया जा रहा था। इसीलिए डीएम ने सख्त कदम उठाते हुए ठेकेदार को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
अधिकतर प्रसूताओं को अब तक यह जानकारी नहीं है कि महिला अस्पताल में अंडा भी दिया जाता है। सुबह के समय आधा किलो दूध और चार ब्रेड पीस दिए जाते हैं। बाकी भोजन में दाल, चावल, सब्जी और छह रोटी का प्रावधान है। यहां बता दें कि अधिकतर मामलों में रात को आए मरीज को सुबह दूध और ब्रेड नहीं मिलती। ठेकेदार की लिस्ट में नाम शामिल होने पर ही मेन्यू के अनुसार सभी वस्तुएं मिलती हैं। यह और बात है कि ठेकेदार के कागजी मेन्यू में अंडे और दूध के अलावा पौष्टिक आहार का वितरण हो रहा था। यहां के कर्मचारियों की माने तो अस्पताल में तीन दिन से भोजन नहीं बंट रहा था। इससे अस्पताल में हलचल शुरू हो गई। कुछ कर्मचारियों और गरीब तबके के मरीज तीमारदारों ने इस मामले की सीधे डीएम से शिकायत की। जिस पर डीएम ने गोपनीय जांच कराई और ठेकेदार की चोरी पकड़ी गई, जिसकी वजह से ठेकेदार को बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
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डीएम के डर से लगातार बंट रहा था भोजन
भोजन का ठेका निरस्त होने के बाद महिला अस्पताल में कार्रवाई का डर सता रहा है। शायद इसी वजह से ठेका निरस्त होने के बावजूद मरीजों को नियमित भोजन मिल रहा है। बुधवार को दाल, रोटी, दूध, ब्रेड भी दी गई। उसी तरह गुरुवार को भी भोजन वितरण किया गया।
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सीएमएस बोलीं! मैंने खुद बंटवाया था भोजन
तीन दिन से भोजन नहीं बंटने के संबंध में महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी ने बताया कि दूध और ब्रेड पीस का वितरण होते उन्होंने स्वयं देखा था और खुद भी मरीजों को बंटवाया था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।