डेढ़ साल बाद मेडिकल कॉलेज के हिस्से में आए बीस करोड़
कई काम अधूरे, निर्माण नहीं हुआ तो मान्यता पर आएगा संकट
लेटलतीफी से रिवाइज हुआ बजट, शासन को सौ करोड़ की चपत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। डेढ़ साल बाद निर्माणाधीन राजकीय मेडिकल कॉलेज को जो आर्थिक राहत मिलने जा रही है वह ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है। शासन ने 66 करोड़ की डिमांड के सापेक्ष यहां के लिए सिर्फ बीस करोड़ मंजूर किए हैं जो एक-दो दिन में आ जाएंगे। निर्माण कार्य समय से पूर्ण नहीं होने पर शासन को सौ करोड़ रुपये की चपत लगेगी। रिवाइज बजट में यह रकम बढ़ाई गई है।
मथुरा रोड स्थित गुनौरा वाजिदपुर गांव के पास जनवरी 2014 में राजकीय मेडिकल कॉलेज की नींव रखी गई। इसका शिलान्यास तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने किया। कॉलेज के भवन निर्माण के लिए 543 करोड़ रुपये व चिकित्सा उपकरण के लिए 20 करोड़ का बजट रखा गया। 2014 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू होने पर अलग-अलग चरणों में करीब तीन सौ करोड़ रुपये का बजट दिया गया। कॉलेज का निर्माण कार्य मई 2017 मेें पूरा होना था। समय से मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए 243 करोड़ रुपये नहीं मिलने से अब कॅालेज निर्माण का बजट 543 करोड़ से बढ़कर 645 करोड़ रुपये हो गया है। इस बजट से सौ करोड़ से ज्यादा की चपत शासन को लगी है। कॉलेज में प्रशासनिक भवन के साथ पांच ब्लॉक बनाये जाने थे। हालांकि तीन साल से कॉलेज के शेष निर्माण के लिए कोई बजट नहीं मिलने पर केवल ओपीडी ब्लॉक का निर्माण ही पूरा हो सका। बाकी के चार ब्लॉक अभी अधूरे पड़े हैं। जिस मकसद के लिए कॉलेज की आधारशिला रखी गई थी, वह मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। अक्तूबर 2016 से कॉलेज की ओपीडी तो जारी है पर गंभीर बीमारियों के लिए ट्रॉमा सेंटर शुरू नहीं हो सका है। हालांकि मेडिकल कॉलेज में लगभग चालीस डॉक्टरों ने कमान संभाल रखी है। वह ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बजट की बाट जोहने वाले कॉलेज में कानपुर से आए नए प्रिंसिपल ने अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए भागदौड़ शुरू कर दी। शासन में दमदार पैरवी करते हुए उन्होंने गंभीर बीमारियों के मरीजों की भर्ती व इलाज के लिए इमरजेंसी ब्लॉक व प्रशासनिक भवन ब्लॉक को पूरा कराने के लिए 66 करोड़ की मांग की। शासन ने मांग मानते हुए लगभग 20 करोड़ की पहली किस्त जारी करने का आश्वासन दे दिया। उम्मीद की जा रही है कि इसी सप्ताह यह रकम राजकीय मेडिकल कॉलेज को मिल जाएगी।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में पांच ब्लॉक बनाए जाने थे। एक ब्लॉक बन चुका है। इसमें ओपीडी चलाई जा रही है। शेष ब्लॉक के निर्माण के लिए बजट नहीं मिल सका है। अब शासन ने जरूरी कार्य के लिए बीस करोड़ रुपये मंजूर कर लिए हैं। जबकि उन्हें 66 करोड़ की दरकार है। निर्माण कार्य 543 करोड़ में पूर्ण होना था। अब यह रकम 645 करोड़ रुपये हो चुकी है।
- आरपी सिंह, प्रिंसिपल राजकीय मेडिकल कॉलेज