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बुखार का कहर कुछ थमा पर दहशत बरकरार
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प्रभावित रहे 68 गांव, 271 लोगों की जान गई, अब भी अनेक लोग हैं चपेट में
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले में बुखार का कहर अब कुछ थमा है पर दहशत बरकरार है, फिलहाल अब भी कई लोग चपेट में हैं।
जिले में बुखार ने ऐसा कहर ढाया कि मृत्यु दर देखकर शासन तक हिल गया। इसके लिए केंद्र और राज्य स्तरीय टीमों को जनपद आकर मोर्चा संभालना पड़ा। जिले में बुखार से 271 लोगों की मौत हुई, यह अलग बात है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इससे कुछ अलग रहे।
जिले में बुखार फैलने की शरुआत 18 अगस्त से हुई थी। शुरुआत मनिकापुर कौंर से हुई। इस गांव में एक साथ करीब 15-20 लोग बीमार पड़े। उसके बाद धीरे-धीरे आस-पास के गांव भी बुखार की चपेट में आ गए। 22 अगस्त से लोगों की मौत का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि फिर रुकने का नाम नहीं लिया। 28 अगस्त से मृत्यु दर 15-20 व्यक्ति प्रतिदिन तक पहुंच गई। चारों ओर हाहाकार छा गया। जिले में फैले बुखार पर कंट्रोल करने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह विफल रहा। अगर केंद्र और राज्य स्तरीय टीमें नहीं आतीं, तो शायद बुखार पर कंट्रोल करना मुश्किल था। जिले में बुखार से मृत्युदर घटाने में केंद्र और राज्य स्तरीय टीमों का विशेष सहयोग रहा। सीएमओ उसी समय क्षेत्र में छिड़काव और कैंप लगवाने शुरू देते तो शायद आज 271 लोगों की जान नहीं जाती। जिले के कुल 68 गांव बुखार से पीड़ित रहे। इनमें 35806 लोग बुखार की चपेट में आए। इनमें स्लाइड के माध्यम से 281 लोगों में वाईवैक्स मलेरिया और 28 में फैल्सीपेेरम मलेरिया की पुष्टि हुई। जबकि किट से जांच में 2097 वाईवैक्स और 1271 फैल्सीपेरम मलेरिया के मरीज निकले। स्वास्थ्य विभाग 271 लोगों की मौतों में सिर्फ 125 लोगों की मृत्यु का कारण पता कर सका है। इसमें भी कुछ लोगों की मृत्यु का कारण फर्जी लिखा गया है।
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सर्जिकल वार्ड में रातभर गायब रहा नर्सिंग स्टाफ
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। इस समय वैसे भी बुखार से जिला अस्पताल के हालात बुरे हैं। अस्पताल के प्रत्येक वार्ड में मरीजों की भरमार है। इसके बावजूद अस्पताल के कुछ कर्मचारी लापरवाही से बाज नहीं आ रहे। सोमवार रात सर्जिकल वार्ड का नर्सिंग स्टाफ गायब रहा। पूरी रात मरीज इधर-उधर परेशान भटकते रहे। जिला अस्पताल के सोमवार रात नौ बजे तक नर्सिंग स्टाफ दिखाई दिया था। उसके बाद स्टाफ कहां चला गया। इसके बारे में कोई नहीं जानता। वार्ड में भर्ती मरीजों की माने तो मध्यरात्रि के समय एक मरीज को तेज दर्द शुरू हुआ था। उसकी हालत देखकर तीमारदार तक घबरा गए। मरीज की हालत देखकर तीमारदार नर्सिंग स्टाफ को देखने गए लेकिन कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं मिला। पूरी रात उनके कमरे में ताला लटका रहा। वहीं मरीजों के साथ तीमारदार पूरी रात परेशान रहे। मंगलवार सुबह ड्यूटी बदलने के दौरान नर्सिंग स्टाफ वार्ड में पहुंच गया। इस लापरवाही से मरीजों में काफी रोष व्याप्त है।
सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर का कहना है कि वैसे तो सर्जिकल वार्ड में नर्सिंग स्टाफ तैनात था। अगर कोई ड्यूटी पर नहीं था। तो यह गंभीर बात है। इसकी हम जांच कराते हैं और फिर कार्रवाई कराएंगे।
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वर्गीकृत होकर दवा लेंगे ओपीडी के मरीज
बदायूं। जिला अस्पताल की ओपीडी का इस समय बुरा हाल है। जानकारी के अभाव में मरीज एक ही लाइन में लगे रहते हैं। उन्हें पता ही नहीं होता कि जिस लाइन में वह लगे हैं उसका डॉक्टर किसी और मर्ज का है। ऐसे में मरीज का समय बर्बाद होता है। इसे देखते हुए सीएमएस ने ओपीडी के गेट से मरीजों का वर्गीकरण करने का फैसला लिया है। सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने बताया कि कभी-कभी ओपीडी में मरीजों की एक ही लाइन दिखाई देती है। उसमें हर मर्ज का मरीज होगा। जबकि ओपीडी में फिजीशियन सात नंबर रूम में बैठते हैं। ईएनटी सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और बच्चों बाले डॉक्टर का अलग रूम है। मरीज को स्वयं मर्ज के मुताबिक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए परंतु जानकारी के अभाव में वह एक ही लाइन में लग जाते हैं। जिससे उनका समय बर्बाद होता और डॉक्टर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। इस समस्या से निपटने के लिए ओपीडी के गेट पर एक व्यक्ति लगाया जाएगा, जो मरीजों को मर्ज के मुताबिक डॉक्टर के पास भेजेगा। उसे कमरा नंबर बताएगा, जिससे मरीज को परेशानी नहीं हो।
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जिला अस्पताल में सफाई अभियान शुरू, काटी जा रही घास
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला अस्पताल में वर्षों से जमी घास खत्म होने की नौबत आ गई है। मंगलवार को सीएमएस के निर्देश पर सफाई अभियान चलाया गया। पेइंग और सर्जिकल वार्ड के बराबर में घास काटकर सफाई अभियान चलाया गया।
दो दिन पहले सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उस समय उन्हें अस्पताल परिसर के नाले-नालियों में गंदगी और मच्छर पनपते मिले थे। परिसर में बड़ी-बड़ी घास देखकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। साथ ही कहा था कि घास में ही मच्छर पनप रहे हैं। घास की तुरंत सफाई होनी चाहिए। उस दिन उन्होंने सफाई ठेकेदार को सख्त आदेश दिए थे।
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अब बेला गांव में पहुंचा बुखार
मूसाझाग। संवेदनशील ब्लाक जगत क्षेत्र के ग्राम बेला में बुखार ने एंट्री कर दी है। अब तक इस गांव में एक-दो मरीज बुखार के देखे जा रहे थे। परंतु अब मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस गांव में कई लोगों को फैल्सीपेरम मलेरिया निकला है। गांव के लोग कई बार स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे चुके हैं परंतु अब तक कोई भी टीम गांव नहीं पहुंची है। बुखार की एंट्री से गांव वाले बेहद परेशान हैं। गांव वालों का कहना है कि टीम एक-दो बार गई थी, लेकिन औपचारिकता निभाकर लौट गई। -----------
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जगत एमओआईसी पर उत्पीड़न का आरोप
मूसाझाग। स्वास्थ्य केंद्र जगत के कर्मचारियों ने अब एमओआईसी पर ही उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यहां तैनात स्वास्थ्य कर्मी रमा देवी और कैथरीन चंद्रा ने बताया कि इस समय दर्जनों गांव में बुखार फैला है। उनकी ड्यूटी इन गांव में लगी है। उन्हें ब्लाक मुख्यालय पर तैनाती मिली है। यहां बैठने के लिए कोई आफिस नहीं दिया गया है। जूनियर कुर्सी पर बैठे रहते हैं और हम खड़े रहते हैं। वह लगातार कार्य कर रहे और उन्हीं का एमओआईसी उत्पीड़न कर रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मी जानकी रौतेला ने भी ऐसा ही आरोप लगाया।
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