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फर्जी मेडिकल रिपोर्ट पर बन
रहे हैं ड्राइविंग लाइसेंस
आई सर्जन ने कहा, एआरटीओ दफ्तर के दलालों ने बनवाई नकली मुहर और हस्ताक्षर
लाइसेंस तो बन रहे, लेकिन फिटनेस टेस्ट के लिए कोई नहीं पहुंचा जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। एआरटीओ कार्यालय कर्मचारियों और दलालों की साठगांठ से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। इसका खुलासा शुक्रवार को तब हुआ जब जिला अस्पताल के डॉक्टर इसकी शिकायत करने एआटीओ के पास पहुंचे। उनका कहना था कि पिछले कई दिनों से एक भी व्यक्ति जिला अस्पताल मेडिकल बनवाने नहीं पहुंचा। बावजूद इसके मेडिकल रिपोर्ट लगाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।
शासन प्रशासन की सख्ती के बावजूद एआरटीओ कार्यालय में कर्मचारियों और दलालों का गठजोड़ नहीं टूटा है। एआरटीओ कार्यालय में फर्जी लाइसेंस बनने का मामला कई महीने से चर्चा में है। शुक्रवार दोपहर जिला अस्पताल में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष कुमार अग्रवाल अपनी टीम के साथ एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। वह सीधे एआरटीओ प्रशासन एनसी शर्मा से मिले और ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में हो रही घपलेबाजी के बारे में बताया। डॉ. पीयूष ने बताया कि पिछले पंद्रह दिनों से कोई व्यक्ति मेडिकल रिपोर्ट बनवाने के लिए जिला अस्पताल नहीं पहुंचा। उन्होंने सवाल किया-क्या ड्राइविंग लाइसेंस बनने पर रोक लगी है? एआरटीओ प्रशासन ने जवाब दिया- ऐसा नहीं है। रोज दर्जनों लाइसेंस बन रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले मेडिकल रिपोर्ट भी ला रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट कहां से बनवाकर ला रहे हैं, इसका कुछ पता नहीं है।
इस पर डॉ. पीयूष कुमार अग्रवाल ने सीधा आरोप लगाया कि ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन में लगाई जा रही मेडिकल रिपोर्ट फर्जी हैं, जो एआरटीओ कार्यालय में ही बनाई जा रही है। जिला अस्पताल में उनके पास पूरा रिकार्ड रहता है कि कितने लोग मेडिकल रिपोर्ट बनवाने आए और कितनों को प्रमाण पत्र दिया गया। जिला अस्पताल से इतनी मेडिकल रिपोर्ट नहीं बनी हैं, जितने एआरटीओ दफ्तर से ड्राइविंग लाइसेंस जारी हुए हैं। साफ है कि कहीं न कहीं एआरटीओ दफ्तर में फर्जीवाड़ा हो रहा है। डॉ. पीयूष ने बातचीत के दौरान एआरटीओ दफ्तर में कई रजिस्टर भी देखे। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जिला अस्पताल में बनाए गए मेडिकल रिपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस में लगाए गई मेडिकल प्रमाण पत्र का मिलान शुरू कर दिया गया है। इससे एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों और दलालों में हड़कंप मचा है। --------
किसने बनाया उंगलियां कटे व्यक्ति का मेडिकल प्रमाण पत्र
-एआरटीओ दफ्तर में एक ऐसे व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए आवेदन पहुंचा है, जिसके हाथ की उंगलियां कटी हुई हैं। इस आवेदन में जिला अस्पताल के नाम से बनी मेडिकल रिपोर्ट लगी है, जिस पर मुहर के साथ डॉक्टर के हस्ताक्षर भी हैं। एआरटीओ कार्यालय से इस मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी करार दिया गया है।
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...तो एआरटीओ कार्यालय में मौजूद है मुहर
-जिला अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि एआरटीओ कार्यालय में बैठे एक व्यक्ति के पास जिला अस्पताल की मुहर है। वह डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर भी कर लेता है। वही फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बना रहा है।
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कोई तो है इसका जिम्मेदार
जिला अस्पताल का नेत्र रोग विभाग ऐसी फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाने से इंकार कर रहा है। एआरटीओ विभाग वाले खुद को बचाने के लिए इससे पल्ला झाड़ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर कौन ऐसा व्यक्ति है, जो फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनवाने से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक का ठेका ले रहा है। फर्जी मेडिकल रिपोर्ट चेक करने की आखिर किसकी जिम्मेदारी है? यह कहां से आ रही हैं और इन्हें कौन बना रहा है। आखिर इसका कोई न तो कोई जिम्मेदार है।
वर्जन-
हमारे यहां कामर्शियल लाइसेंस को मेडिकल रिपोर्ट की जरूरत पड़ती है। प्राइवेट लाइसेंस को नहीं। हमारे यहां जो मेडिकल रिपोर्ट बनकर आई हैं उन पर जिला अस्पताल की मुहर और हस्ताक्षर हैं। वह फर्जी हैं या जिला अस्पताल से आई हैं यह स्वास्थ्य विभाग जाने। फिलहाल एक मेडिकल रिपोर्ट पकड़ी गई है। इसके लिए सीएमओ को लिखा है। मेडिकल रिपोर्ट बनवाने वाले के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
-एनसी शर्मा, एआरटीओ प्रशासन ------------
यह सब फर्जीवाड़ा एआरटीओ विभाग में हो रहा है। फर्जी मेडिकल रिपोर्ट भी बन रही है और उस पर ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी हो रहे हैं। काफी दिनों से कोई भी व्यक्ति मेडिकल रिपोर्ट बनवाने अस्पताल नहीं पहुंचा। तब पता चला कि फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाई जा रही हैं। हम एआरटीओ कार्यालय इसलिए गए थे कि इस तरह के फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा जाए।
- डॉ. पीयूष कुमार अग्रवाल, नेत्र रोग विभाग