गंदगी और बदबू के पर्याय
हैं सार्वजनिक शौचालय
सफाई करने नहीं पहुंचते नगर पालिका कर्मचारी, लोगों को हो रही है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया था। इसके बाद प्रदेश के सभी शहरों में स्वच्छता अभियान चला। मंत्री, सांसद और विधायकों से लेकर अधिकारी तक सड़कों पर झाड़ू थामे नजर आए थे। मगर यहां के शहरवासियों के लिए स्वच्छता अभियान बेमानी है। शहर में जगह-जगह स्थायी और अस्थायी सार्वजनिक शौचालयों में भरी गंदगी से निकलती बदबू से लोग परेशान हैं। इधर से गुजरने में लोगों को परेशानी होती है।
करीब दो महीने पहले शहर में नगर पालिका की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर 15 अस्थायी शौचालय रखे गए थे। इन शौचालयों की नियमित सफाई करने की जिम्मेदारी नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों की है। शुरू में दो चार दिन कर्मचारी सफाई करने पहुंचे भी, लेकिन इसके बाद सब भूल गए। नतीजा स्वच्छता के नाम पर रखे गए सार्वजनिक शौचालय गंदगी का ढेर बन गए।
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शौचालयों का हाल
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फोटो-10 बीडीएन 11
नाले में पड़ा अस्थायी शौचालय नगर पालिका की ओर से शहर में दो महीने पहले करीब 15 अस्थायी शौचालय रखवाए गए थे। ताकि घर से बाहर निकले लोगों को अचानक प्रसाधन की जरूरत पड़े तो वे इसका इस्तेमाल कर सकें। पालिका की ओर से लगवाए गए शौचालयों की शुरू में एक-दो बार सफाई हुई, मगर कुछ दिन बाद ही कर्मचारी इनमें सफाई करना भूल गए हैं। हालत यह है कि महिला अस्पताल से लावेला चौक पर रखा अस्थायी शौचालय नाले में गिर गया।
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फोटो-10 बीडीएन 12
शौचालय के इर्द-गिर्द है गंदगी
लावेला चौक से पुलिस लाइन चौराहे के बीच में प्राइवेट बस स्टैंड बना है। यहां पर गांव, कस्बों से जिला मुख्यालय खरीदारी करने रोजाना काफी संख्या में लोग आते-जाते हैं। वहीं प्राइवेट बस स्टैंड पर एक प्राइवेट सुलभ शौचालय व एक सार्वजनिक मूत्रालय बना है, इस मूत्रालय के आसपास गंदा पानी भरा हुआ है। जिससे भयंकर बदबू आती है। प्राइवेट बसों का संचालन वहीं से होने की वजह लोगों को वहां पर मजबूरी में रुकना पड़ता है। जिस कारण उन्हें परेशानी होती है।
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फोटो-10 बीडीएन 13
वार्डों में बने शौचालय बांट रहे बीमारी
जिला अस्पताल में बने शौचालयों की स्थिति भी दयनीय है। वार्डों में बने शौचालय की कई-कई दिनों तक सफाई नहीं होती है। इससे वहां पर बदबू आने लगती है। इसको लेकर कई बार तीमारदारों ने अस्पताल स्टाफ से शिकायत भी की लेकिन वह अपनी मर्जी के मुताबिक काम करते हैं। ऐसे में मरीजों के साथ-साथ तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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वर्जन--
शौचालयों की सफाई के लिए कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। इनकी रूटीन में सफाई कराई जा रही है। फिर भी किसी जगह पर कोई समस्या हो तो उसके बारे में कार्यालय में शिकायत करें, प्राथमिकता के आधार पर समस्या का समाधान होगा।
-निशा मिश्रा, ईओ नगर पालिका --------------
वर्जन
वार्डों में रोजाना सफाई की जाती है। वहीं शौचालय के लिए कड़े निर्देश दिए हैं कि इन्हें विशेष सफाई अभियान चलाकर साफ करें। ताकि मरीजों व तीमारदारों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने पाए।
- डॉ. आरएस यादव, सीएमएस