बदायूं। जानलेवा स्वाइन फ्लू के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में शामिल जिले में स्वाइन फ्लू का पहला केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। सीएमओ ने एडवाइजरी जारी करके स्कूल कॉलेजों में प्रार्थना सभाएं बंद करने को कहा है। इस संबंध में डीआईओएस और बीएसए के जरिये सभी स्कूल कॉलेजों को पत्र भेजा गया है। जिला स्तर पर रेपिड रिस्पांस टीम बनाई गई है। पिछले पांच साल से स्वाइन फ्लू का वायरस जिले में कहर बरपाता रहा है।
स्वाइन फ्लू का वायरस अगस्त से अक्तूबर तक सक्रिय रहता है। ज्यादातर केस इन्हीं महीनों मिलते हैं। स्वाइन फ्लू का सीजन शुरू होने से पहले ही शासन ने दिशा निर्देश जारी कर दिए थे। बदायूं को खतरे के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में जिलों में रखा गया था। शनिवार को बिसौली तहसील के गांव हतरा निवासी 35 वर्षीय नईम पुत्र सज्जाद को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। हालांकि, नईम का इलाज बरेली में चल रहा है। तबियत बिगड़ने पर नईम 17 अगस्त को जिला अस्पताल पहुंचा था। यहां से उसे बरेली रेफर कर दिया गया। स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर उसका सेंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था। स्वाइन फ्लू का पहला केस सामने आने के बाद जिले के स्कूल कॉलेजों को स्वास्थ्य विभाग ने पत्र जारी कर प्रार्थना सभाएं बंद करने की एडवाइजरी जारी की है। विभाग का कहना है कि जिन स्थानों पर ज्यादा भीड़ होती है वहां फ्लू के फैलने का खतरा बना रहता है। प्रार्थना सभाओं में भारी संख्या में छात्र-छात्राएं एक ही स्थान पर जमा हेते हैं। ऐसे में एहतियात के तौर पर फिलहाल प्रार्थना सभाओं को रोक देना चाहिए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण-
स्वाइन फ्लू के लक्षण यूं तो सामान्य जुकाम जैसे ही होते है, लेकिन इसमें हलका बुखार भी आता है। भूख कम हो जाती है और नाक से पानी बहता है। कुछ लोगों को गले में जलन, उल्टी और डायरिया की भी शिकायत होती है।
स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी में अंतर
जब सामान्य सर्दी लगती है तो वह जल्द ही ठीक भी हो जाती है, लेकिन स्वाइन फ्लू होने पर जल्दी ठीक नहीं होता। इसका प्रभाव घातक होता है। शरीर में कमजोरी आ जाती है। सर्दी होने पर बुखार नहीं आता जबकि फ्लू होने पर 100-102 डिग्री के बीच बुखार आम बात है। सर्दी लगने पर सिर दर्द और बदन दर्द कम ही होता है, लेकिन स्वाइन फ्लू होने पर सिरदर्द के साथ असहनीय बदन दर्द होता है। सर्दी होने पर अमूमन नाक बंद हो जाती है। स्वाइन फ्लू होने पर नाक बहती है।
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू
यह बीमारी इंसान से इंसान को लगती है, जब कोई स्वाइन फ्लू का मरीज छीकता है, तो उसके आसपास तीन फीट की दूर तक खड़े व्यक्तियों के शरीर में स्वाइन फ्लू का वायरस प्रवेश कर जाता है।
स्वाइन फ्लू से बचने को सावधानियां-
छींकते समय टिस्यू पेपर से नाक को ढकें और उस पेपर से सावघानी से नष्ट कर दें।
हाथों को बार-बार साबुन से घोते रहें। घर, ऑफिस के दरवाजों के हेंडल, कीबोर्ड, मेज आदि साफ करते रहें।
यदि आपको जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो घर से बाहर और दूसरों के नजदीक न जाएं।
यदि आपको बुखार आए तो उसके ठीक होने के 24 घंटे बाद तक घर पर रहें।
संभव है इलाज
स्वाइन फ्लू का इलाज आम तौर पर संभव है। एनटी वायरल दवाओं जैसे रिलेंजा और टेमीफ्लू का कोर्स करके इस बीमारी से लड़ा जा सकता है। ये दवाईयों इस वाइरस को फैलने से रोकती हैं। यदि स्वाइन फ्लू होने 48 घंटों के भीतर इन दवाओं का उपयोग शुरू कर दिया जाए तो इनका अच्छा असर होता है, लेकिन ये दवाईयों चिकित्सकों की राय से ही लेनी चाहिए।
वर्जन-
स्कूल कॉलेजों को एडवाइजरी जारी कर दी गई है। आम लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। भीड़-भाड़ वाले स्थानों से दूर रहें। अगर किसी को जुकाम होता है या फ्लू के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। स्वाइन फ्लू का इलाज संभव है।
-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
स्वाइन फ्लू के केस-
- वर्ष 2010 में दो केस सामने आए। इनमें एक की मौत हो गई।
- वर्ष 2011 स्वाइन फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया।
- वर्ष 2012 में भी दो केस सामने आए। इनमें एकब मौत हो गई।
- वर्ष 2013 स्वाइन फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया।
- वर्ष 2014 उझानी ब्लॉक में स्वाइन फ्लू से एक मौत।
- वर्ष 2015-2016 में कोई केस सामने नहीं आया।
- वर्ष 2017 में अब तक एक केस सामने आया।