उसहैत। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती गांवों में संकट बढ़ा दिया है। भुंडी गांव के पास गंगा ने तेजी से कटान शुरू कर दिया है। अब तक करीब 200 बीघा कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है। वहीं, दातागंज का सकतपुर टापू बन चुका है। कदमनगला में तीन झोंपड़ीनुमा घर बाढ़ में समा गए हैं। लोगों ने अपने आशियाने तोड़ने शुरू कर दिए हैं। अब तक छह मकान तोड़े जा चुके हैं और पांच और तोड़े जा रहे हैं।
भुंडी गांव के पास तटबंध के बाहर की ओर गंगा लगातार जमीन काट रही है। ग्रामीण रामसिंह, श्यामसिंह, लोकपाल, राजबहादुर और जगपाल समेत कई किसानों की जमीन गंगा में समा चुकी है। इन खेतों में धान की फसल खड़ी थी। कई किसानों ने खेतों में यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए थे। अब कटान बढ़ने पर किसान इन पेड़ों को खुद काटकर तटबंध के किनारे डाल रहे हैं, ताकि कटान की रफ्तार को कुछ कम किया जा सके।
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कदमनगला में लगातार बिगड़ रहे हालात
-कदमनगला में गंगा कटान का असर लगातार बढ़ रहा है। गांव के अधिकांश परिवार सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कुछ ग्रामीण अब भी गांव में रहकर अपने मकानों को तुड़वा रहे हैं, ताकि ईंट, सरिया और अन्य सामान को सुरक्षित निकाला जा सके। मकान तुड़वा रहे अमित कुमार ने बताया कि उनका करीब 300 वर्ग गज में बना एक मंजिला मकान था। इसमें पांच परिवार रहते थे। मकान कटने से करीब 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार कदमनगला में अब तक छह मकान गंगा में समा चुके हैं, जबकि पांच अन्य मकानों को ग्रामीण खुद तुड़वा रहे हैं।
तीन परिवारों को आर्थिक मदद की प्रक्रिया शुरू
-प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राशन वितरण के साथ ही मकान क्षति से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कदम नगला के राजाराम, नेकराम और मीना महेश के मकान गंगा में कटने के बाद उनकी फाइल तैयार कर आगे भेजी गई है। लेखपाल अमित ने बताया कि इन तीन ग्रामीणों के मकान कटान में नष्ट हुए हैं। नियमानुसार इनको आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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स्वास्थ्य शिविर लगाकर बांटी दवाएं
-बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी शिविर लगाए गए हैं। कदमनगला और रैपुरा में स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच के बाद जरूरत के अनुसार दवाएं भी वितरित की गईं। वहीं, प्रशासन का दावा है कि दल नगला, कदमनगला और रैपुरा में अब तक 550 पैकेट राशन वितरित किए जा चुके हैं।
वर्जन-
-गंगा कटान कर रही है। लेकिन इससे तटबंध को कोई खतरा नहीं है। टीमों की ओर से लगातार गांवों का सर्वे किया जा रहा है।
- उमेश चंद्रा, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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कई गांवों का संपर्क कटा, मदद की आस में ग्रामीण
फोटो- 16,17,18,
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। रामगंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी लगातार जारी है। निचले इलाकों में पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ चौकी हजरतपुर क्षेत्र का करीब एक हजार आबादी वाला सकतपुर गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है। यहां आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बची है। वहीं, कटकौरा गांव का मार्ग भी पानी में डूब गया है। ग्रामीण दो से तीन फुट पानी से होकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के गांव हर्रे नगला और गढ़िया के बीच अरिल नदी पर बने रपटा पुल के ऊपर करीब चार फुट पानी बह रहा है। पानी अधिक होने के कारण यहां पुल के ऊपर नाव चल रही है। यह पुल फर्रुखाबाद तक कई गांवों को जोड़ने का प्रमुख माध्यम है। वहीं, सकतपुर के ग्रामीण फिलहाल जर्जर निजी नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। प्रधान अवनीश कश्यप ने बताया कि प्रशासन ने दो छोटी नावों की व्यवस्था की है। जल्द ही इन्हें भी आवागमन के लिए शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, हजरतपुर पुल के पास से हररामपुर तक करीब एक किलोमीटर की दूरी में लगभग तीन फुट पानी बह रहा है। यहां नाव और ट्रैक्टर-ट्रॉली से लोगों का आवागमन हो रहा है। हजरतपुर-गढ़िया रंगीन और नगरिया खनू-गढ़िया रंगीन मार्ग भी पानी से घिरे हुए हैं। उधर, रामगंगा के उस पार नवादा बदन, कटकौरा, भेड़ा, लालपुर खादर, कुंडरा, मजरा पूरन भेड़ा और शेरपुर समेत करीब 12 गांवों का संपर्क बाहरी क्षेत्र से कटा हुआ है। हालांकि अभी तक किसी गांव की आबादी के अंदर पानी नहीं पहुंचा है।
सिमरिया में फिर मंडराया कटान का खतरा
दातागंज। रामगंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच सिमरिया गांव में एक बार फिर कटान का खतरा मंडराने लगा है। गांव के किनारे सड़क और मंदिर के पास का काफी हिस्सा कट चुका है। नदी अब गांव से महज डेढ़ से दो मीटर की दूरी पर बह रही है। खतरे को देखते हुए दो परिवारों ने अपने मकान खाली कर घरेलू सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। गांव को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड ने करीब 20 दिन पहले हजारों रेत की बोरियां लगाकर सुरक्षा दीवार तैयार की थी, लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद आधे से अधिक बोरियां रामगंगा में बह गईं। इससे गांव की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गांव किनारे रहने वाले ओमपाल और जगपाल के मकानों पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। दोनों परिवारों ने एहतियातन घर का सामान निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। संवाद
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वर्जन-
-बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। 14 नाव और आठ गोताखोरों की व्यवस्था की गई है। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। फिलहाल किसी भी गांव की आबादी में पानी नहीं पहुंचा है।
-विनोद कुमार सिंह, एसडीएम दातागंज
सिमरिया गांव के नजदीक पहुंची रामंगा। संवाद
सिमरिया गांव के नजदीक पहुंची रामंगा। संवाद
सिमरिया गांव के नजदीक पहुंची रामंगा। संवाद
सिमरिया गांव के नजदीक पहुंची रामंगा। संवाद
सिमरिया गांव के नजदीक पहुंची रामंगा। संवाद