बदायूं। हर बार तारीख पर तारीख दिए जाने के कारण मुख्यमंत्री की योजना को जिले के अधिकारी भूल गए। यही वजह रही कि शासन की ओर से दिए गए 1500 शादी कराने के लक्ष्य में से महज 397 शादी ही प्रशासन करा पाया। शादी के फॉर्म जमा करने के बाद अगर बार-बार तिथियों को नहीं हटाया जाता तो शायद लक्ष्य के काफी करीब पहुंच गए होते। हालांकि अभी वित्तीय वर्ष खत्म होने में कुछ समय शेष है, लेकिन अधिकारी अब चुनाव के ‘फेर’ में पड़ गए हैं। ऐसे में सात फेरे लेना अब संभव नजर नहीं आ रहा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभालने के बाद गरीबों, किसानों के हित में लगातार काम करना शुरू किया। इसी कड़ी में उन्होंने गरीब बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शुरू की। इस योजना के तहत शादी करने वालों का खाने से लेकर टेंट तक का पूरा खर्च प्रदेश सरकार वहन करती है। गरीब बेटियों के खाते में 21 हजार रुपये गृहस्थी चलाने के लिए दिए जाते हैं।
शासन ने बदायूं जिले में वर्ष 2018-19 में शादी कराने का लक्ष्य 1500 जोड़ों का रखा था, लेकिन अधिकारियों ने पूरे वर्ष इस लक्ष्य को पूरा कराने की ओर ध्यान नहीं दिया। बार-बार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की तिथि बदली जाती रही। इस पर शासन स्तर तक से नाराजगी जताई गई। उसके बाद प्रशासन की ओर से कार्यक्रम का आयोजन कर 140 जोड़ों की शादियां कराई गई। इसके बाद दो बार तहसील स्तर पर कार्यक्रमों के आयोजन कराए गए। इसमें 257 जोड़ों की शादियां करा दी गई। अब वित्तीय वर्ष भी समाप्ति की ओर बढ़ गया, वहीं चुनाव आयोग ने भी आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी। ऐसे में सभी अधिकारी चुनाव में व्यस्त हो गए। चुनाव की तैयारियों की वजह से गरीब बेटियों की शादी कराने के लिए अब अधिकारियों के पास समय नहीं बचा है।
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सरकार ने अनुदान की राशि बढ़ाकर 51 हजार की
प्रदेश सरकार की ओर से शादी अनुदान के रूप में मिलने वाली धनराशि बढ़ाकर अब 51 हजार रुपये कर दी गई है। अब तक समाज कल्याण विभाग की ओर से जो भी शादी कराई गईं थीं, उसमें शासन की ओर से प्रत्येक जोड़े को 35-35 हजार रुपये का लाभ मिला था, लेकिन नौ फरवरी को कछला गंगाघाट पर प्रशासन की ओर से जो 128 शादियां कराई गई हैं, उन सभी की शादी कराने के लिए समाज कल्याण विभाग को प्रति शादी 51-51 हजार रुपये मिले। इसमें 35 हजार रुपये नकद नवविवाहित दंपती के खाते में दिया जाएगा। छह हजार रुपये केे उपहार के लिए सामान लिया गया, साथ ही 10 हजार रुपये टेंट, खाने आदि में खर्च हुआ।
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तीन बार हटाई गईं तारीख
विभाग की ओर से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी करने वालों के आवेदन लिए गए थे। आए आवेदनों की जांच के उपरांत उन्हें योजना में शामिल किया, लेकिन शादी की प्रस्तावित तारीख को अधिकारियों की ओर से एक बार नहीं बल्कि तीन बार हटाया गया। ऐसे में उस समय आवेदन करने वालों की शादी नहीं हो सकी। मजबूरन कई परिवारों ने कर्जा लेकर अपने बेटे-बेटियों की शादी कराई। अगर ये तिथि नहीं हटाई गई होती है। तो शायद कई गरीब बेटियों की शादी इस योजना के तहत हो जाती, और विभाग लक्ष्य के करीब भी पहुंच जाता।
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सभी अधिकारी चुनाव की तैयारियों में लगे हुए हैं। उच्च अधिकारियों की ओर से अब तक इसके लिए कोई निर्देेश नहीं दिए हैं। अगर निर्देश मिले, तो उसका पालन किया जाएगा।
-राकेश कुमार गुप्ता, समाज कल्याण अधिकारी