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बंदरों के हमले से बेटा घायल, पिता ने सदमे में दम तोड़ा

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बंदरों के हमले में बेटा घायल, पिता ने सदमे में दम तोड़ा
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छत पर उतारने गया था कपड़े, तभी बंदरों ने बोला हमला
अमर उजाला ब्यूरो
सिलहरी (बदायूं)। कुंवरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम बाबट में बंदरों के झुंड ने एक युवक पर हमला बोल दिया, जिससे वह छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिवार वाले उसे इलाज के लिए बरेली ले जा रहे थे कि बेटे के घायल होने की खबर सुनकर पिता ने सदमे में दम तोड़ दिया। इस घटना से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह घटना कुंवरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम बाबट की है। यहां के 90 वर्षीय इकबाल हुसैन कुछ समय से बीमार चल रहे थे। सोमवार सुबह परिवार वालों ने उन्हें नहलाया, वहीं कपड़े छत पर सूखने के लिए डाल दिए। दोपहर के समय उनका 50 वर्षीय बेटा मुख्तार कपड़े उतारने के लिए छत पर चढ़ा, परंतु उससे पहले छत पर बंदरों का झुंड आकर बैठ गया। एक बंदर इकबाल हुसैन के कपड़े ले गया। मुख्तार ने कपड़े छीनने के लिए बंदर का पीछा किया। इस पर बंदरों के झुंड ने मुख्तार पर ही हमला बोल दिया, जिससे वह छत से नीचे आ गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। परिवार वाले मुख्तार की हालत देखकर घबरा गए और उसे तुरंत शहर के निजी अस्पताल ले गए, जहां से मुख्तार को हालत देखकर बरेली के लिए रेफर कर दिया गया। इधर, जब इकबाल हुसैन को पता चला कि उनका बेटा बंदरों के हमले से घायल हो गया है उसकी हालत नाजुक है और उसे बरेली भेजा गया है। यह सुनकर उन्हें सदमा लगा और उन्होंने दम तोड़ दिया। एक साथ हुईं दो घटनाओं से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं ग्रामीणों में लगातार बढ़ रही बंदरों के हमलों की घटनाओं से आक्रोश है।
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ग्रामीणों की भी सुनिए
फोटो-51
हमारे गांव में बंदरों का आंतक बहुत बढ़ गया है। गांव के कई लोगों को बंदर काट चुके हैं। एक तो वैसे भी जिला अस्पताल में एआरवी की दिक्कत है। ऊपर से बंदरों के हमले बढ़ते जा रहे हैं।
-राजवीर सिंह

फोटो-52
हमारे गांव में तो बंदरों ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। कभी किसी की चप्पल ले जाते हैं तो किसी के कपड़े फाड़ डालते हैं। लोग अपने नए कपड़े सुखाने से भी डरते हैं कि कहीं बंदर न ले जाए और फाड़ डाले।
-जावेद अंसरी

फोटो-53
अब तो बंदरों ने घरेलू नुकसान तो दूर फसलों को भी उजाड़ना शुरू कर दिया है। सुबह-सुबह बंदरों की टोली खेत में पहुंच जाती है। ईख की फसल को तोड़कर बर्बाद कर दिया है। बरसीम, गेहूं, धान, सरसों और अन्य फसलों में नुकसान कर रहे हैं।
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-नेपाल सिंह

फोटो-54
हमारे गांव में बंदर नहीं थे। आस-पास गांव से आ गए थे। धीरे-धीरे इनका कुनबा इतना बढ़ गया कि आज गांव का हर व्यक्ति परेशान है। जिला प्रशासन को इसके लिए कोई कदम उठाना चाहिए। इनकी संख्या बढ़ने से रोकी जाए, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।
-मुनेंद्र सिंह
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