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एकादशी पर गंगा में डुबकी लगाएंगे हजारों श्रद्धालु

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ककोड़ा मेला। - फोटो : अमर उजाला
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मेला ककोड़ा। गंगा तट पर लगने वाले मेला ककोड़ा में भीड़ उमड़ने लगी है। एकादशी का मेला ककोड़ा में विशेष महत्व है। इसलिए सोमवार शाम से काफी संख्या में श्रद्धालु गंगा तट पर पहुंचने लगे, जो गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य कर संत महात्माओं का आशीर्वाद लेंगे। बाद में खिचड़ी भोज होगा। देवोत्थानी एकादशी की मान्यता है कि चर्तुमास के उपरांत भगवान विष्णु जागते हैं। विष्णु और लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा और व्रत किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन सालिगराम और तुलसी का विवाह हुआ था।
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प्रभुदास प्रवीण कुमार शास्त्री ने बताया कि इस दिन दोवोत्थान से पूर्णिमा में गंगा तट पर प्रवास कर गंगा स्नान और दान पुण्य करने से एकादशी के व्रत का फल मिलता है। भीष्म ने भी यहीं व्रत कर बैकुंठ धाम को प्राप्त किया। मेले में इस दिन गन्ना, सिंगाड़े शकरकंद आदि की बिक्री भी होती है।
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गंगा तट पर सफाई के दावे हुए फेल, फैली है गंदगी
मेला ककोडा। मेला ककोड़ा में जहां सरकार की मंशा के अनुरूप गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सफाई रखने को अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं मेले में गंगा के तट पर गंदगी ही गंदगी दिखाई दे रही है। तमाम कचरा प्लास्टिक के गिलास गंगा तट पर पड़े हैं, जिनमें से हवा के साथ प्लास्टिक के गिलास गंगा में बह जाते हैं। सैकड़ों सफाई कर्मचारियों को मेले में स्वच्छता के लिए लगाया गया है,जो केवल अधिकारियों के कैंपस की व्यवस्था में ही लगे हैं। सफाई व्यवस्था पूरी तरह फेल है। जहकि एक दिन पूर्व ही जिलाधिकारी ने सफाई के लिए कड़ेे निर्देश दिए थे।
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गंगा पार दूसरी धारा में कूदने गए सफाई कर्मी को जल पुलिस ने बचाया
मेला ककोडा। मेले में वीआईपी कैंपस की ओर सफाई कर्मियों का टेंट लगा है, सभी सफाई कर्मी वहीं मौजूद थे। अचानक वरचऊ निवासी सफाई कर्मचारी कपड़े उतार कर गंगा पार कर गया। गंगा से एक किमी दूर गंगा की दूसरी धारा बह रही है, जिसमें वह कूदना चाह ही रहा था तब तक जल पुलिस के जवानों ने उसे पकड़ लिया।
जल पुलिस के दरोगा सुनील कुमार ने बताया कि सफाई कर्मी के गंगा पार जाने की सूचना पर तुरंत ही जवानों ने बोट से गंगा पार कर एक किमी दूर दौड़ लगाकर दूसरी गंगा की धारा में कूदने से पूर्व ही उसे पकड़ लिया। समय पर नहीं पहुंचते तो अनहोनी भी हो सकती थी।
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अस्पताल तैयार, पर न एंबुलेंस, न डॉक्टर और न दवा
मेला ककोडा । सैकडों परिवार यहां ठहरे हैं। मगर गंगा की कटरी में चिकित्सा के लिए कोई सुुविधा नहीं हैं न तो कोई डॉक्टर ही है और न ही दवा। आपात स्थिति के लिये कोई एंबुलेंस भी नहीं है जबकि जिला पंचायत की ओर से अस्पताल बनवा दिया गया है। दो दर्जन से अधिक स्टाफ की भी तैनाती की गई है। ---
मेला शुरू पर अब तक नहीं बना मुख्यद्वार और स्नानगृह
मेला ककोड़ा। मिनी कुंभ मेला शुरू हो गया है। अब तक मेले का मुख्यद्वार नहीं बन पाया है । गंगा घाट पर महिला श्रद्धालुओं के लिए अभी कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे लोगों में रोष है।
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