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डबल मर्डर में पिता-पुत्र समेत तीन को उम्रकैद

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डबल मर्डर में पिता-पुत्र
समेत तीन को उम्रकैद
सन 2011 में मामूली बात पर कर दी गई थी दो लोगों की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
मामूली बात पर दो लोगों की गोली मारकर हत्या करने के जुर्म में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीर अहमद द्वितीय ने पिता-पुत्र समेत तीन मुजरिमों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दो मुजरिमों पर 22-22 हजार रुपये और एक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना बोला है। जुर्माने की रकम जमा होने पर दोनों मृतकों के आश्रितों को 16-16 हजार रुपये देने का आदेश अदालत ने दिया है।
यह दोहरा हत्याकांड 29 अप्रैल 2011 को हजरतगंज थाना क्षेत्र के सिमरई गांव में हुआ था। रिपोर्ट वहां के ऋषिपाल ने लिखाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वादी ऋषिपाल के रिश्ते के चाचा चंद्रसेन के घर के पीछे सरसों के पूले रखे थे। उसमें से एक पूला उसी गांव के योगेंद्र पुत्र राधेश्याम ने चोरी कर लिया था। इसी को लेकर चंद्रसेन और योगेंद्र के बीच गाली गलौज हो गई थी। कहासुनी के दौरान वादी का भाई सियोराज और उसकी भाभी मुन्नी देवी पहुंच गए। उन्होंने योगेंद्र और चंद्रसेन से गालियां देने को मना किया। इसी बीच वहां पहुंचे योगेंद्र के पिता राधेश्याम पुत्र श्रीराम, जयवीर पुत्र रामपत व उसका बेटा मेनपाल पहुंच गए और बंदूकों से फायरिंग शुरू कर दी। उनकी बंदूक से निकली एक गोली वादी के भाई सियोराज के सीने में तथा दूसरी गोली उसकी तहेरी भाभी मुन्नी देवी के सीने में जा लगी। इससे दोनों की मौके पर मौत हो गई। ऋषिपाल की ओर से राधेश्याम, उसके बेटे, जयवीर तथा उसके बेटे मेनपाल के खिलाफ नामजद हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के बाद मुकदमे में चार्जशीट लगाकर कोर्ट में दाखिल की।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीर अहमद द्वितीय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद तीनों मुजरिमों राधेश्याम, जयवीर व उसके बेेटे मेनपाल को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी। मुजरिम राधेश्याम व जयवीर पर 22-22 हजार और मेनपाल पर 20 हजार जुर्माना लगाया।
मुकदमे में नामजद चौथा मुल्जिम नाबालिग है या नहीं इसके निर्णय को पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई है, जो अभी लंबित है।
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बीच बचाव के लिए गए थे, चली गई जान
बरेली। जरीफनगर इलाके के सिमरई गांव निवासी सियोराज और उसकी तहेरी भाभी मुन्नी देेवी का मुजरिमों से कोई विवाद नहीं था। वे दोनों तो केवल झगड़ा शांत कराने के लिहाज से बीच-बचाव करने गए थे। मगर इसी बीच मौके पर पहुंचे मुजरिमों ने झगड़े की असलियत जानने के बजाय गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। इसमें बेकसूर सियोराज व मुन्नी देवी की जान चली गई।
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29 अप्रैल को जरीफनगर थाना क्षेत्र के सिमरई गांव में हुए उपद्रव के पीछे कोई बड़ी वजह नहीं थी। सरसों का पूूला उठाने पर लोगों ने तिल का ताड़ बना दिया। दो लोगों में कहासुनी के बाद जमकर गोलीबारी और पथराव हुआ था। इससे गांव में भगदड़ मच गई थी। गांव वाले खुद को बचाने के लिए अपने घरों में दुबक गए थे। माहौल शांत कराने के लिए जिले के आला अफसर मौके पर पहुंचने के साथ कई थानों की पुलिस बुलाने पड़ी थी। पुलिस के पहुंचने के बावजूद लोग डर की वजह से अपने घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। घटना के बाद गांव में कई दिनों तक दहशत रही थी, जिससे पुलिस को मुस्तैद रहना पड़ा। घटना के बाद इलाके के लोग मुजरिम पक्ष से खौफ मानने लगे थे। अदालत का फैसला आने के बाद पीड़ित पक्ष काफी खुश है।
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