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सिंथेटिक दूध से बन रहा नकली पनीर

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सिंथेटिक दूध से बन
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रहा नकली पनीर
होली से पहले जिले में मिलावटखोरों ने शुरू किया कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले में दूध से बने पदार्थों में मिलावट का धंधा काफी पुराना है। त्योहार के नजदीक आने के साथ ही इस धंधे में तेजी आ जाती है। होली से पहले शहर समेत बिनावर, अलापुर इलाके में मिलावटी पनीर का धंधा जोरों पर है।
होली पर मिठाइयों की खपत को लेकर दुकानदार खोवा का स्टाक करने में जुटे हैं। खपत बढ़ने के साथ ही बाजार में मिलावटी पनीर और खोवा की बिक्री बढ़ गई है। बाजार में इन दिनों कई तरीके का पनीर अलग-अलग रेट में मिल रहा है। बाजार में 180 से 320 रुपये तक के रेट का पनीर बिक रहा है। तीन सौ रुपये की करीब बेचे जाने वाले पनीर को दुकानदार बिल्कुल शुद्ध बताते हैं तो दूसरे पनीर को क्रीम निकले दूध का बताया जताया है। इस बीच दुकानदार सिंथेटिक दूध से बने पनीर का बिल्कुल जिक्र नहीं करते। जबकि सच्चाई यह है कि बाजार में ज्यादातर पनीर सिंथेटिक वाला ही है। लोग गलती से इसकी खरीद कर लेते हैं। जिले के बिनावर क्षेत्र में होली से पहले इसका कारोबार काफी बढ़ गया है। यहां से रोडवेज बसों में रखकर पनीर बाहर भेजा जाता है।
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आंकड़े बोलते हैं
दरअसल आंकड़ों की मानें तो देश में करीब 15 करोड़ टन दूध का उत्पादन होता है। ऐसे में अगर इस पूरे दूध को पनीर बनाने में भी खर्च कर दें तो 7 लाख टन पनीर ही बन सकता है। जबकि हमारे देश में पनीर की डिमांड हर साल लगभग 25 फीसदी की दर से बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त देश में 5 लाख टन पनीर की खपत हो रही है। जबकि देश में पूरे दूध का पनीर तो बनता नहीं है। ऐसे में ये साफ है कि घरों तक नकली या मिलावटी पनीर भेजकर मुनाफा कमाने वाले अपना खेल कर रहे हैं।
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मिलावटी पनीर से होती हैं ये बीमारी
मिलावटी पनीर के प्रयोग से डिहाइड्रेशन, डायरिया और फूड प्वाइजनिंग तक का खतरा रहता है। डॉ. सचिन गुप्ता का कहना है कि त्योहार के समय जहां तक संभव हो दूध लेकर घर में पनीर बनाकर इस्तेमाल करें। इससे कम से कम सेहत नहीं बिगड़ेगी। अगर पनीर या खोवा खरीदें तो जानकार लोगों की मदद से या विश्वासपात्र दुकानदारों से ही खरीदें।
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