बदायूं। एक तरफ तो शासन प्रशासन बिजली की बचत करने के लिए आदेशों के साथ-साथ तमाम जतन कर रहा है, लेकिन सरकारी विभाग ही उन आदेशों को दरकिनार कर हवा में उड़ाए दे रहे हैं। बिजली की बचत करना तो दूर, नगर में लगी स्ट्रीट लाइटों को दिन में जलाकर बिजली की फिजूलखर्ची की जा रही है। ऐसे में बिजली की बचत कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।
शासन ने बिजली का खर्च कम करने के लिए एलईडी लगाने के सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को आदेश दिए थे। शासन के आदेश के अनुपालन में डीएम दिनेश कुमार सिंह ने भी इस बात को अपने स्तर से आगे बढ़ाया। बावजूद इसके शहर में न तो शासन के आदेश पर अमल हो रहा है और न ही डीएम के आदेश को तवज्जो दी जा रही है। डीएम ने पिछले दिनों सभी निकायों के ईओं की मीटिंग लेकर शासन की मंशा से अवगत कराया था, लेकिन नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही की एक तस्वीर इसमें भी साफ झलक रही है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। शहर में विधायक से लेकर नगर पालिका के चेयरमैन तक सत्ता पक्ष के है। इसके बावजूद शासन की प्राथमिकताओं वाली योजनाएं और आदेश शहर में लागू नहीं हो पा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह सरकारी मशीनरी है। जो शासन की जनहित वाली योजनाओं को अपने हित की वजह से लागू नहीं होने दे रही है। नगर पालिका प्रशासन भी शासन से लेकर जिला प्रशासन तक के निर्देशों को हवा में उड़ाए हुए है। इसके चलते छह महीने बाद भी शहर में एलईडी युक्त लाइट खंभों पर नहीं लग सकीं। पहले नगर पालिका की ओर से 4130 सोडियम की लाइट लगवाई गईं थी, ताकि सड़कों पर रात के समय पर्याप्त रोशनी रहे और लोगों को उधर से निकलने में कोई दिक्कत न हो। बावजूद इसके अब तक शहर में 2460 सोडियम लाइन लगी हुई हैं। कुछ जगहों पर एलईडी लाइट लगाकर खानापूर्ति जरूर कर ली गई है।
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कई स्थानों पर तो दिन में जलती है सोडियम लाइट
जहां एक ओर शासन-प्रशासन सोडियम लाइट की जगह एलईडी लगाकर बिजली बचाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं पालिका प्रशासन की लापरवाही की वजह से रात के साथ-साथ दिन में भी सोडियम लाइट जलाई जा रही हैं। इससे बिजली का बिल बेवजह बढ़ रहा है, लेकिन पालिका के अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है।
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शासनादेश के क्रम में सभी नगर निकायों को एलईडी लाइट लगाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में सभी को इस आदेश का अनुपालन करना आवश्यक है।
-दिनेश कुुमार सिंह, डीएम