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दहेज हत्या में सास-ससुर को आजीवन कारावास

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दहेज हत्या में सास-ससुर
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को आजीवन कारावास
बदायूं। छह साल पहले दहेज के लिए विवाहिता की हुई हत्या के मामले में षष्टम् अपर सत्र न्यायाधीश देवराज प्रसाद सिंह ने सास-ससुर को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। पति के नाबालिग होने पर उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में लंबित है। इस मामले में आरोपी रहे ननद और देवर को पुलिस ने विवेचना में क्लीनचिट दे दी थी।
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घटना थाना सिविल लाइंस के खेड़ा बुजुर्ग में 22 नवंबर 2013 को हुई थी। शहर के मोहल्ला लोचीनगला निवासी लटूरी लाल ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसने अपनी पुत्री गायत्री की शादी खेड़ा बुजुर्ग निवासी ब्रजपाल के पुत्र के साथ की थी। शादी में उसने चार लाख रुपये खर्च किए थे। इसके बाद भी गायत्री के ससुराल वाले तीन लाख रुपये और बाइक की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे। वह ससुराल वालों की मांग पूरा नहीं कर सका। आरोप है कि इसी से नाराज ससुराल वालों ने 22 नवंबर को गायत्री की गला दबाकर हत्या कर दी। लटूरी ने इस मामले में पति के अलावा सास कलावती, ससुर ब्रजपाल पुत्र सियाराम, देवर और ननद के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद ब्रजपाल, कलावती और मृतका के पति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अपर सत्र न्यायाधीश देवराज प्रसाद सिंह ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी अनिल सिंह राठौड़ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सास-ससुर को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर जुर्माना भी लगाया। अदा होने पर 50 फीसदी रकम वादी को देने का भी आदेश सुनाया है।
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