बदायूं। ऐतिहासिक सूर्यकुंड की जमीन पर उपले थोपे जा रहे हैं। यही नहीं बहुत से लोग यहां खुले में शौच भी करते हैं। जुआरी और आवारा किस्म के लोगों ने भी यहां बसेरा बनाया हुआ है, इसके विपरीत जिला प्रशासन इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं। इस ऐतिहासिक स्थल के जीर्णोद्धार के नाम पर अब तक करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं पर व्यवस्थाएं ठीक न होने से यहां घूमने आने वाले लोग काफी परेशान हैं।
राजा महिपाल सिंह ने अपनी राजधानी में शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर 11 वीं शताब्दी में सूर्यकुंड का निर्माण कराया था। पुराने दौर के कुछ अवशेष समेटे हुए ऐतिहासिक सूर्यकुंड का सपा सरकार के दौरान जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया गया। सपा शासनकाल के दौरान ऐतिहासिक सूर्यकुंड की बाउंड्री और सीढ़ियों के सुधार पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए। सत्ता परिवर्तन होने के बाद इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया, काफी समय बाद भाजपा के पदाधिकारियों ने ध्यान देना शुरू किया। इसके बाद राजकीय निर्माण निगम की ओर से करीब एक करोड़ की लागत से घूमने आने वाले लोगों के लिए टॉयलेट, बैठने के लिए सीटें, फुटपाथ, लाइटिंग का काम किया गया। जिससे ऐतिहासिक सूर्यकुंड अपनी अलग पहचान बनाने लगा, लोग भी पहुंचने लगे, लेकिन बाद में आसपास के लोगों के सूर्यकुंड की जमीन पर कब्जा कर उपले थोपने और वहां शौच करने से स्थिति बिगड़ गई। सूर्यकुंड घूमने आने वाले कई लोगों ने बताया कि ऐतिहासिक स्थल पर दिन हो या रात अनेक लोग खुले में शौच करते हैं। इसी कैंपस में बने जूनियर हाईस्कूल के आगे गेट के बराबर जमीन पर अब तक कई लोग उपले थाप रहे हैं तो उन्होंने बटिया बनाना भी शुरू कर दिया है। इतना होने के बाद भी प्रशासन इस ऐतिहासिक स्थल की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों ने बताया कि गेट का दरवाजा पहले ही गांव के लोग तोड़ चुके हैं। शराबियों और जुआरियों का यहां डेरा है। लोगों ने मांग की है कि ऐतिहासिक स्थल पर चौकीदार को तैनात कर ऐसे लोगों का प्रवेश होने से रोका जाए।
जो लोग सूर्यकुंड की जमीन पर उपले पाथ रहे हैं। उन्हें समझाकर जल्द ही यहां से हटाया जाएगा।
-धर्मवती, प्रधान
ऐतिहासिक जमीन पर किसी को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। अगर वहां पर किसी का कब्जा है, उन्हें वहां से हटाया जाएगा। अगर लोग नहीं मानेंगे तो कार्रवाई की जाएगी। -पारसनाथ मौर्य, एसडीएम सदर