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बदायूं में गांधी के आने से तेज हुआ था आजादी का आंदोलन

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जरा याद करो कुर्बानी
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फोटो-26-
बदायूं में गांधी जी के आने से तेज हुआ था आजादी का आंदोलन
तीन दिन बदायूं में रहे थे, यहां दो बार आना हुआ
बदायूं के क्रांतिकारियों की बढ़ी थी नजदीकियां
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। गांधीजी का जब पहली बार बदायूं आगमन हुआ, तो उनके भाषणों को सुनने के बाद में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग अंग्रेजों के विरोध में आ गए थे। इसके बाद बदायूं में आजादी के आंदोलन ने जोर पकड़ा था। बदायूं के क्रांतिकारियों का उत्साह देख गांधीजी काफी प्रभावित हुए थे और यहां तीन दिन तक रुके। इस दौरान उन्होंने कई जगह भाषण भी दिए। खिलाफत आंदोलन में मौलाना अब्दुल माजिद बदायूंनी के भाषणों से महात्मा गांधी बेहद प्रभावित हुए थे। उन्हीं के दावतनामे पर बदायूं आए थे। गांधी जी के साथ में मीर महफूज अली, कस्तूरबा गांधी, मौलाना शौकत अली, डॉ. सैफुद्दीन, निसार अहमद कानपुरी भी आए थे। इसके बाद वह जामा मस्जिद घूमे और कादरी मंजिल में रुके। वहीं उन्होंने एक सभा को संबोधित किया, लेकिन उस वक्त आंधी आने की वजह से टैंट उड़ गया। इसके बाद गांधी जी ने पार्वती कॉलेज में महिलाओं को संबोधित किया था। गांधी जी के भाषण का असर महिलाओं पर खासा पड़ा और उन्होंने अपने जेवर उतारकर उन्हें दे दिए। इस दौरान गांधी जी बदायूं में तीन दिन रुके। तीन मार्च 1921 को उन्होंने यहां दातागंज रोड पर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय में सभा को संबोधित किया। महात्मा गांधी के बदायूं दौरे ने क्रांतिकारियों में जोश भर दिया था। इसके बाद भारत की आजादी तक बदायूं के क्रांतिकारी किसी भी मोर्चे पर अंग्रेजों के समाने नहीं झुके।
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गांधी जी के बदायूं में दिए भाषण के प्रमुख अंश
बदायूं में गांधी जी ने कहा था कि हम आठ महीने में स्वराज हासिल कर सकते हैं, बशर्ते हम कुछ शर्तों को मानें।
- अहिंसा का प्रयोग केवल धर्म से ही नहीं, विचारों से भी किया जाए। -हिंदू-मुस्लिम एकता कायम की जाए और मिलकर एक कौम बनाएं। -भारत का 60 करोड़ रुपया हर साल विदेशों को जाता है। इसे बचानेे में स्वदेशी का प्रयोग करें।
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-शरीर के साथ विचारों में भी स्वच्छता रखी जाए। नशीली चीजें जैसे बीड़ी-सिगरेट, अन्य मादक पदार्थों और बुरी चीजों का परित्याग किया जाए।
-गवर्मेंट की ओर से सख्ती की जाए, तो किसी हालत में डर महसूस न करें।
-अंग्रेजों को परेशान न किया जाए और जो अपने विचारों से मेल नहीं रखते उन पर किसी प्रकार का दबाव न डाला जाए।
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