बदायूं। दो दिन पहले सहसवान से बिसौली रोड पर तेज रफ्तार पिकअप गन्ने भरी ट्रॉली में घुुस गई थी। इस हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई थी। जिले में तेज रफ्तार वाहनों की वजह से हादसे का यह कोई पहला मामला नहीं, लगातार ऐसे हादसे हो रहे हैं और लोग इनसे सबक नहीं ले रहे।
यातायात नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं। वाहनों की ओवरस्पीड से उनका असंतुलित होना आम बात है। ऐसे वाहनों पर बैठे अधिकतर लोग हेलमेट भी नहीं लगाए होते हैं, इस वजह से इनमें से कई लोगों की मौत हो जाती है तो कई अपने हाथ-पैर तुड़वा बैठते हैं। हाल फिलहाल जिले में ऐसे वाहनों की वजह से कई घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि लगातार घटनाओं के बाद भी लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे। होली के सीजन में यह हादसे और भी बढ़ने की आशंका है। तब तेज रफ्तार बाइकों पर दो या दो से अधिक लोग तेजी से निकलते हैं और इसकी वजह से इन वाहन चालकों के साथ ही दूसरे लोगों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।
स्पीड मापने का दुरुस्त इंतजाम नहीं
बदायूं। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस के पास वाहनों की रफ्तार मापने का मुकम्मल इंतजाम नहीं है। एआरटीओ प्रवर्तन अमिताभ राय ने बताया कि स्पीड इंटरसेप्टर काफी महंगा यंत्र है। यह मंडल मु ख्यालय पर विशेष गाडी में लगा है। जरूरत पर दो या तीन माह में उसे बरेली से बदायूं लाकर हाईवे किनारे गाड़ी खड़ी करके वाहनों की स्पीड चेक कर लेते हैं। वहीं, यातायात पुलिस के टीएसआई राममिलन ने बताया कि उनके विभाग पर स्पीड रडार नाम का यंत्र है। इससे तेज वाहनों की स्पीड नापकर कार्रवाई की जाती है। इंटरसेप्टर के लिए उच्चाधिकारियों के जरिये शासन को मांग भेजी गई है।
चालान के बावजूद सुधार नहीं
बदायूं। तेज वाहन चलाने वालों का परिवहन अधिकारी और ट्रैफिक पुलिस दोनों ही चालान करते हैं पर वाहन चालक सुधरने का नाम नहीं ले रहे। एआरटीओ श्री राय के मुताबिक उनका फोकस बड़े वाहन होते हैं। महीने भर में पांच से दस वाहनों का चालान ओवरस्पीड में किया जाता है। वहीं टीएसआई ने बताया कि वह औसतन पचास वाहनों का तेज गति से चलने में चालान करते हैं।