सात दिन से लापता बसपा के बरेली मंडल जोन इंचार्ज जयपाल शाक्य शनिवार देर रात मिल गए तो रविवार को सिविल लाइन थाने में उनके बयान दर्ज किए गए। उन्होंने टिकट की खातिर पैसा लेने और विरोध करने पर अपहरण कराने का आरोप लगाकर पार्टी में अपने ही वरिष्ठों पर खुलकर आरोप लगाए। कहा कि उनकी गुमशुदगी को बयान के आधार पर अपहरण में तरमीम करके जांच की जाए। उनकी बताई कहानी पुलिस के गले नहीं उतर रही।
जयपाल शाक्य ने इंस्पेक्टर देवेश सिंह और विवेचक जसवीर सिंह को बताया कि उझानी से लेकर दूसरे कस्बों में लाखों रुपये लेकर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों को बसपा के टिकट दिए गए, चूंकि वह इन सभी बैठकों में शामिल होते थे तो उन्हें इसकी पूरी जानकारी थी। उन्होंने दो नवंबर की बैठक में इसका विरोध किया और अपना इस्तीफा हाईकमान को भेज दिया। इससे नेता खिसिया गए और जिलाध्यक्ष हेमेंद्र गौतम ने उन्हें माफी मांगने के बहाने से होटल में बुलाया था। चार नवंबर की शाम वह होटल में जाने से पहले पास की गली में लघुशंका कर रहे थे कि पीछे से आए मुख्य जोन इंचार्ज बरेली निवासी संजीव सागर और आगरा निवासी आजाद सिंह व उनके ड्राइवर ने उन्हें पकड़ लिया। उनके मुंह पर रूमाल डाला जिससे उन्हें नशा हो गया। ये लोग इनोवा से उन्हें रामगंगा की कटरी में ले गए और कुछ बदमाशों के हवाले कर दिया। वहां खेतों के बीच बने किसी मकान में उन्हें बंद कर दिया। शनिवार रात जब बदमाश शराब के नशे में थे तो वह निकल भागे और 15 किलोमीटर चलकर बरेली के अलीगंज थाने पहुंचे। जयपाल ने बताया कि उन्हें इन लोगों से जान का खतरा है। इनके खिलाफ अपहरण की धारा बढ़ाकर जांच की जाए और उन्हें सुरक्षा दी जाए। इंस्पेक्टर ने उन्हें आश्वासन देकर वापस भेज दिया।
शहर से सरेशाम अपहरण की कहानी समझ नहीं आ रही। जयपाल पूरी तरह सेहतमंद और सुरक्षित हैं, अपहरण करने वाला इतनी आसानी से उन्हें भागने भी नहीं देता। फिर भी उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। अगर वास्तव में कोई दोषी है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- देवेश सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइन