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पेट भरने के लाले पड़े हैं, शौचालय कहां से बनवाएं

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दातागंज। गंगा किनारे के गांवों को ओडीएफ करने के लिए सरकार की ओर से भले ही खासतौर पर अभियान चलाया जा रहा है लेकिन क्षेत्र में रामगंगा किनारे के कई गांवों की आबादी खुले में शौच को जाने के लिए विवश है। आधार दर्जन गांवों में तो एक भी शौचालय नहीं है। सरकार की ओर से स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्रामीणों को खुले में शौच न जाने और शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है लेकिन इसके लिए सरकारी मदद अब तक न मिलने की वजह से ग्रामीण अपने घरों में शौचालय नहीं बनवा पाते हैं। गरीबी की वजह से खुले में शौच को जाना उनकी नियति बन चुकी है।
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ग्राम पंचायत धमीपट्टी के राजस्व गांव कटकौरा के रघुवीर कहते हैं कि मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जैसे-तैसे दो जून के लिए रोटी जुटा पाते हैं। ऐसे में रोटी खाएं या शौचालय बनवाएं। कटकौरा रामगंगा से मात्र 300-400 मीटर की दूरी पर है। एक हजार की आबादी वाले इस गांव एक भी शौचालय नहीं है। नतीजतन, गांव की महिलाएं और नवविवाहिताएं भी खुले में शौच के लिए जाती हैं। गांव के बुजुर्ग प्रहलाद, मोहन, सुखलाल, ऊधौ, सुंदर, श्यामपाल, दयाराम, रोशन, रघुवीर बताते हैं कि कई साल पहले आई बाढ़ में गांव कट गया था उसके बाद से फिर से लोगों ने बसेरा बना लिया था। बानो, मायादेवी, शबाना, संतोषा बताती हैं कि शौच को खुले में जाते हुए महिलाओं को बेहद शर्मिदगी होती है, लेकिन मजबूरी है। चूंकि सभी परिवार कृषि और मजदूरपेशा हैं इसलिए वे आर्थिक रूप से खुद शौचालय बनवा पाने में समर्थ नहीं हैं, ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकारी सहयोग मिल जाए तो वे अपने घर में शौचालय बना लें लेकिन पंचायत राज विभाग ने अभी भी इस गांवों में ग्रामीणों के लिए शौचालय मंजूर नहीं किए हैं। गांव पूरन भेंडा की आबादी 12 सौ है, लेकिन इस गांव में शौचालय एक भी नहीं है। गांव मौजमपुर, गढ़िया पेगम्बरपुर और नवादा बदन भी ऐसे गांव की श्रेणी में आते हैं जहां एक भी शौचालय नहीं हैं। राजपाल नगला, पट्टी बिजा,लालपुल खादर बड़े गांव की गिनती में आते हैं,लेकिन तीनों गांवों में शौचालयों की संख्या आधा दर्जन मुश्किल से होगी।
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क्या कहते हैं गांव वाले-
फोटो-22बीडीएन-7
शौैचालय नहीं होने के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। अंधेरे में ही निकलना पड़ता है। यदि शौचालय होता तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती।
-संतोषा निवासी कटकोरा
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हर घर में शौचालय होना चाहिए। वह सरकार से मांग करती हैं कि गांव में हर किसी के घर में शौचालय की व्यवस्था करे।
- मायादेवी, कटकोरा
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मजबूरी में खुले में शौच को घर से निकलना पड़ता है। घर की माली हालत ऐसी नहीं है कि शौचालय बनवा सके।
-शबाना, कटकोरा
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गांव वालों की तो आदत बन गई है, लेकिन रिश्तेदारों आदि आते हैं तो उन्हें भी खुले में जाना पड़ता है, शमज़् आती है।
-सुंदर ,कटकोरा
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