बदायूं। हर साल परिषदीय स्कूलों के बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क यूनिफार्म को लेकर शासन स्तर से तमाम कड़े फरमान जारी होते हैं। साफ कहा जाता है कि बच्चों को समय से यूनिफार्म उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए। मगर यहां पर हकीकत कुछ और ही है। भले ही विभागीय कागजों में प्रत्येक बच्चे को यूनिफार्म उपलब्ध हो गई हो लेकिन हकीकत में अभी आधे स्कूलों के बच्चों को नई यूनिफार्म मिली ही नही है।
काबिल-ए- गौर तो यह है कि नये सत्र को शुरू हुए कई माह हो चुके हैं। शासन ने यूनिफार्म उपलब्ध कराने को जिले के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 331494 छात्र-छात्राओं को यूनिफार्म देने के लिए दो महीने पहले पांच करोड़ की धनराशि विभाग को उपलब्ध करा दी थी, लेकिन ज्यादातर विद्यालयों में अभी तक यूनिफार्म का वितरण नहीं हो सका है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं के चेहते भी यूनिफार्म का काम कर रहे हैं, जो खुद ही गाड़ियों से स्कूलों में यूनिफार्म पहुंचा रहे हैं। उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं है, मगर शिक्षकों पर दबाव है सो वह बिना कुछ कहे ही यूनिफार्म स्कूल में भिजवा देते हैं।
विभागीय सूत्र भी बता रहे हैं कि जिले के 2488 परिषदीय विद्यालयों में अब तक आधे स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म नहीं मिली है। शासन ने जिले के 331494 बच्चों की यूनिफार्म को 75 फीसदी धनराशि पहली किस्त में अगस्त में ही दे दी थी। बताते हैं कि कमीशन के खेल के चलते बच्चों को समय से यूनिफार्म उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।
लगभग सभी स्कूलों यूनिफार्म बंट चुकी हैं। निरीक्षण के दौरान बच्चे नई ड्रेस में मिलते हैं। एक दो विद्यालय बचा है जहां कोई दिक्कत रही होगी। सरकार से बच्चे हुए बच्चों की ड्रेस के लिए दूसरी किस्त की मांग की गई है। -प्रेमचंद्र यादव, बीएसए
...मंत्री ने कहा था गुणवत्ता में न हो खेल
बदायूं। प्रदेश के न्याय और कानून मंत्री बृजेश पाठक के सामने भी बदायूं में यूनिफार्म की गुणवत्ता खराब होने का मामला आया था। पत्रकारों से पूछने पर उन्होंने कहा भी था कि यदि कहीं पर यूनिफार्म की गुणवत्ता खराब होती है तो विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।