बदायूं। परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षा कराने के लिए शिक्षा निदेशक की ओर से 16 से 25 मार्च के बीच की तिथि दी गई है। ऐसे में इसको लेकर विभागीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है, लेकिन पिछले दिनों शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक अपनी-अपनी मांगों को धरने पर रहे, वहीं इससे पहले शिक्षक अन्य कामों में व्यस्त रहे, जिस वजह से पढ़ाई नहीं हो पायी। ऐसे में परिषदीय स्कूलों में आधे-अधूरे कोर्स की पढ़ाई होने के बाद विद्यार्थी परीक्षा कैसे देंगे, यह बड़ा सवाल है।
परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षक पूरे साल कहीं न कहीं शिक्षण कार्य के अलावा अन्य कामों में व्यस्त रहे। शिक्षकों को हाउस होल्ड सर्वे, शारदा योजना के तहत बच्चों की संख्या को बढ़ाने के साथ बीएलओ ड्यूटी में लगाया गया। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई। इसके अलावा सत्र शुरू होने के दौरान छात्रों को समय पर नई किताबें नहीं मिल सकीं। तीन माह बाद मिली किताबों के कारण बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किताबों के अभाव में बच्चों की आधी-अधूरी ही तैयारी हुई। इधर परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षामित्रों को शैक्षिक कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुछ ऐसे स्कूल भी हैं, जहां शिक्षामित्र पर ही चार्ज है। शिक्षामित्रों का समायोजन समाप्त होने पर उन्होंने आंदोलन शुरू कर दिया था, जिसके चलते काफी समय तक अधिकतर स्कूलों में ताले लटके रहे। इसके चलते शैक्षिक कार्य प्रभावित रहा। अब सत्र समाप्त हो रहा है। शिक्षा निदेशक ने वार्षिक परीक्षा कराने के भी निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन स्कूलों में कोर्स पूरा न होने की वजह से विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी असमंजस की स्थिति में हैं।
जल्द ही परीक्षा कराई जाएगी। इसके लिए तैयारी की जा रही है, ताकि अध्यापक समय से रिपोर्ट कार्ड बना सकें।
- रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए