बदायूं। जाम की समस्या से जूझ रहे शहरवासियों को इससे निजात पाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। ठेकेदार ने बाईपास बनाने के लिए 31 मार्च तक का समय लिया है, क्योंकि अब भी इसके निर्माण में बिजली के खंभे अड़ंगा डाले हुए हैं, वहीं दूसरी ओर सोत नदी पर बनने वाले पुल को भी अभी शासन की ओर से अनुमति नहीं मिल सकी है। इस वजह से वहां पर काम अधूरा पड़ा हुआ है। हालांकि अब भी काफी संख्या में बड़े वाहन बाईपास का उपयोग कर रहे है, लेकिन बारिश के दिनों में ये रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है।
वर्ष 2016 में सपा शासनकाल के दौरान बदायूं में बाईपास बनाने का काम शुरू हुआ। सवा आठ किलोमीटर लंबे बाईपास के निर्माण को 110 करोड़ रुपये की लागत तय की गई थी। तय मियाद के अनुसार इसे पिछले साल अक्तूबर में ही बन जाना चाहिए था, लेकिन अभी इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसके बन जाने के बाद से शहर में बड़े वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से बंद हो जाएगा। उझानी रोड पर बने राजकीय मेडिकल कॉलेज के पास से निकल रहे बाईपास से सीधा बरेली रोड को जोड़ा जाएगा। इससे बरेली, आगरा, मथुरा जाने आने वाले वाहनों को शहर में घुसने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन अभी तक शासन की ओर से सोत नदी पर बनने वाले पुल के लिए स्वीकृति नहीं मिली है। इसके लिए विभाग की ओर से शासन को 12 करोड़ छह लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, जो अब तक पास नहीं हुआ है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल सोत नदी पर सीमेंट का पाइप डाल दिया गया है।
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95 प्रतिशत मिट्टी का काम पूरा
बाईपास के निर्माण में मिट्टी से संबंधित काम लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। ठेकेदार ने बताया कि बारिश की वजह से तीन महीने काम लगभग बंद रहा। इस वजह से निर्माण कार्य के लिए 31 मार्च तक का समय मांगा था, जो मिल गया है। इस बीच में काम पूरा कर लिया जाएगा।
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खराब सड़क बताने को नहीं लगे बोर्ड
बाईपास निर्माण पूरा नहीं हुआ है, लेकिन वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। कई जगह सड़क खराब पड़ी है। यहां वाहन धंस सकते हैं या कोई हादसा हो सकता है। इसके लिए ऐसे स्थानों पर नोटिस बोर्ड लगाने चाहिए थे परंतु ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है।
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फैक्ट फाइल
- सन-2016 में शुुरू हुआ था निर्माण
- कुल लंबाई-सवा आठ किलोमीटर
- कुल लागत- 110 करोड़
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अभी कुछ जगहों पर काम चल रहा है। ठेकेदार ने मार्च से पहले इसका निर्माण पूरा होने की बात कही है। बिजली विभाग को भी खंभे हटाने के बारे में कहा जा चुका है।
-हेमंत सिंह, एक्सईएन निर्माण, पीडब्ल्यूडी