बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले की जांच कर रही एसआईटी आंवला से आई खाद का अभिलेखों के आधार पर लगभग मिलान कर चुकी है। रिकॉर्ड के हिसाब से खाद आने की पुष्टि हुई है परंतु खाद गोदाम या रास्ते से कैसे गायब हो गई, इसके रिकॉर्ड नहीं मिले हैं। एसआईटी से जुड़े अधिकारियों की मानें तो आरोपी जगतपाल भलीभांति जानता है कि घोटाला कैसे हुआ, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में आने से पहले ही फरार हो चुका है। आगे की जांच उसकी गिरफ्तारी पर आकर टिक गई है।
खाद घोटाला कोई अचानक नहीं हुआ था। इसके लिए घोटालेबाजों की बाकायदा एक टीम थी, जिसका मुखिया गोदाम प्रभारी जगतपाल था। परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी उसके सहयोगी थे। तीनों की मिलीभगत से ही इतना बड़ा खाद घोटाला हुआ था। इसकी पुष्टि पीसीएफ की विभागीय जांच में हुई है। इधर, एसआईटी ने जांच शुरू करने से पहले गोदाम में खाद आने-जाने के संबंध में रिकॉर्ड मांगे थे। टीम को रिकॉर्ड तो मिले लेकिन वे सिर्फ गोदाम में खाद आने के थे। गोदाम से खाद जाने के कोई रिकॉर्ड नहीं मिले। उन गोदामों का प्रभारी जगतपाल था, जबकि खाद लाने और ले जाने की जिम्मेदारी परिवहन ठेकेदार की थी। तत्कालीन अधिकारी की देखरेख में खाद लाई और ढोई गई थी। इससे एसआईटी की जांच में तीनों आरोपी बुरी तरह फंस गए हैं। माना जा रहा है कि यह घोटाला इन्हीं लोगों ने किया था। अब एसआईटी के सामने आरोपियों की गिरफ्तारी शेष रह गई है, जिससे पूछताछ के बाद पता चल सके कि आखिर उन्होंने यह घोटाला कैसे किया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।