गंगा विकराल रूप धारण करती जा रही हैं। जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ती जा रही है। बाढ़ से कई गांवों के संपर्क मार्ग कटे हुए हैं। हजारों एकड़ फसल गंगा में समा चुकी है। जानवरों के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। मंगलवार को डीएम दिनेश कुमार सिंह ने फिर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भी बांटी गई। जिले में कभी गंगा और कभी रामगंगा का प्रकोप बढ़ जाता है। गंगा और रामगंगा में आई बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोगों की जिंदगी बदहाल हो गई है। उनके लिए हर तरफ केवल आफत ही आफत है। घर के अंदर पानी घुस जाने से दो वक्त रोटी मिलना मुश्किल है। कहीं तख्त के ऊपर गैस और सिलेंडर रखकर खाना बना रहे हैं। वहीं सोने के लिए भी ऐसा ही इंतजाम करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा घरों में सांप और अन्य विषैले जीवों का डर बना हुआ है। बाढ़ के पानी से तंग अधिकतर इलाकों के लोग अपनी पशुओं के साथ बंधों पर शरण ले रहे हैं। लोगों को पशुओं और खुद के जरूरी सामानों के इंतजाम के लिए दिन भर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं प्रशासन की ओर से कुछ स्थानों पर राहत सामग्री का वितरण किया गया।
2010 में आयी बाढ़ जैसे बनने लगे हालात
बदायूं जिले में 2010 में बाढ़ आयी थी। उसने हर तरफ तबाही मचा दी थी। आम पब्लिक से लेकर प्रशासन तक को झकझोर कर रख दिया था। जिले में चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। 2010 में जब बाढ़ आयी थी, उस समय गंगा का गेज 164.04 मीटर पहुंच गया था। जबकि मंगलवार को गंगा का जलस्तर 163.75 रिकार्ड किया गया है। जो उस समय आयी बाढ़ से मात्र 29 सेंटीमीटर कम रहा है। जिस तेजी से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। उसे हिसाब से जल्द ही गंगा का जलस्तर उस निशान का क्रास कर देगा।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का डीएम ने किया दौरा, पहुंचे परौटी गांव
बदायूं/ सहसवान। तहसील सहसवान के बाढ़ से प्रभावित गांव परौटी के पीड़ित लोगों की डीएम दिनेश कुमार सिंह ने समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि बाढ़ पीड़ित व्यक्तियों की हर हाल में मदद की जाए। किसी प्रकार जनहानि नहीं होनी चाहिए। तहसीलदार और लेखपाल जमीन चिह्नित कर ग्रामीणों को बसाएं। उन्होंने परेशान गर्भवती महिला को निजी गाड़ी से अस्पताल भेजकर भर्ती कराया।
डीएम ने अनाज पैकेट को खुलवाकर एक-एक वस्तु को चेक किया। उन्होंने एडीएम एफआर महेंद्र सिंह को निर्देश दिए कि बाढ़ग्रस्त गांवों में जाकर राहत सामग्री वितरित कराएं। इसमें 10-10 किलो आटा, चावल, आलू, 2-2 किलो दाल, भुजे चना, बिस्कुट 10 पैकेट, रिफाइंड एक लीटर, नमक एक किलो, मोमबत्ती एक पैकेट, हल्दी, मिर्च, धनिया ढाई-ढाई सौ ग्राम, माचिस एक पैकेट, परमल 5 किलो राहत सामग्री उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। डॉक्टरों को निर्देश दिए कि गांवों में मलेरिया की दवाई बराबर वितरित करें। गांवों में एंटी लार्वा दवाई की फॉगिंग रोजाना कराएं। जिससे मच्छर न पनप सकें। रात में सोते समय सभी लोग मच्छरदानी का प्रयोग करें। गांव वालों ने कहा कि इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए दूसरे सुरक्षित स्थान पर बसा दिया जाए। डीएम ने कहा कि सभी बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर डेढ़-डेढ़ सौ गज जगह देकर बसा दिया जाएगा। जिससे उन्हें बाढ़ से हमेशा के लिए छुट्टी मिल सकेगी।