छतों से टपक रहा पानी, कमरों में जलभराव
बारिश ने किया परिषदीय स्कूलों का हाल-बेहाल, बच्चों की पढ़ाई पर लगा ब्रेक
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। शासन और जिला प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग के अफसर तक परिषदीय स्कूलों की दशा और दिशा सुधारने में जुटे हैं। बेसिक स्कूलों में रंग रोगन के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। बच्चों और उनके घरवालों को आकर्षित करने के लिए दोपहर का मुफ्त खाना, किताबें और यूनिफार्म दी जाती है। मगर शहर में जर्जर भवनों में चल रहे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की चिंता किसी को नहीं है। यहां पढ़ने वाले बच्चे हर समय खतरे के साए में रहते हैं। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश ने इन बच्चों की पढ़ाई पर ब्रेक लगा दिया है। बारिश में जर्जर स्कूलों की छत टपकने के साथ कमरों में पानी भर जाता है। बारिश के दौरान शहर के बेसिक विद्यालय बंद करने पड़ते हैं। शहरी क्षेत्र में कुल 15 स्कूल हैं जो सभी जर्जर हालत में हैं। बारिश में स्कूलों की छत टपकने से जलभराव हो जाता है। इससे बच्चों और स्टाफ दोनों की जान को खतरा रहता है। शिक्षकों की माने तो उन्हें मजबूरन अवकाश घोषित करना पड़ता है। यह बात केवल इस साल की नहीं, बल्कि वर्षों से यह सिलसिला चला आ रहा है। जर्जर स्कूलों में तैनात शिक्षक और विभाग के अफसर पत्र लिख-लिखकर थक चुके हैं। मगर सुनने वाला कोई नहीं, न जिला प्रशासन, और न शासन। इन विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए एक मात्र कक्ष है। रात में बारिश होने के बाद सुबह बच्चे स्कूल पहुंच जाते हैं तो जलभराव के कारण उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।
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कबूलपुरा के दोनों परिषदीय विद्यालयों पर ताले लटके
शहर के मोहल्ला कबूलपुरा में प्राथमिक विद्यालय प्रथम और द्वितीय हैं। इन दोनों स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं। इसमें कक्षा एक से पांच तक के बच्चे पढ़ते हैं। पांचों क्लास एक ही कमरे में लगते हैं। गुरुवार रात झमाझम बारिश हुई थी। शुक्रवार की रात रिमझिम बारिश होती रही। छत टपकने से कमरे में बारिश का पानी भर गया। बच्चों के बैठने को अन्य कोई जगह नहीं है। जलभराव की वजह से शुक्रवार और शनिवार को कबूलपुरा के दोनों प्राथमिक विद्यालय बंद रहे।
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पॉलिथीन में बांधकर रख दी किताबें और बच्चों की कर दी छुट्टी शहर के मोहल्ला ऊपरपारा स्थित प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग जर्जर है। शुक्रवार और शनिवार की रात में बारिश हुई। शनिवार को दिन में भी छत से पानी टपकता रहा। चूंकि एक से पांच तक की कक्षाएं एक ही कमरे में चलती हैं। इस कारण मजबूरन प्रधानाध्यापक ने छुट्टी कर दी। यहां बच्चों के लिए आईं किताबें बारिश के पानी में भीग गईं, जिन्हें पॉलिथीन में बांधकर एक कोने में रख दिया गया।
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वर्जन......
कमरे में भरा पानी, कैसे पढ़ें बच्चे बच्चों की समस्त कक्षाएं एक ही भवन में लगती हैं। बारिश होने पर स्कूल में पानी भर जाता है। बच्चों को बैठाने के लिए दूसरा स्थान उपलब्ध नहीं हैं। शुक्रवार को स्कूल खोला गया, लेकिन जलभराव के कारण निर्धारित समय से पूर्व ही अवकाश घोषित करना पड़ा।
-बुशरा कौसर, प्रधानाध्यापक, परिषदीय विद्यालय कबूलपुरा।
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शिक्षकों की ओर से जलभराव की समस्या को लेकर अवगत कराया गया था। बच्चों की पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए इस कारण विद्यालयों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए शासन से मंजूरी मांगी गई है। जब तक मंजूरी नहीं मिलती विद्यालयों की नियमित सफाई कराकर पढ़ाई कराई जाएगी। -राममूरत, डीआईओएस/ बीएसए।