बदायूं। शहर के पूर्व विधायक आबिद रजा के मैरिज हॉल को तुड़वाने के आदेश के साथ ही सोत नदी पर कब्जे का मुद्दा फिर प्रासंगिक हो गया है। इसकी तह में जाएं तो सोत समेत दूसरी नदियों के किनारे लगातार हो रहे कब्जों के लिए सरकारी सिस्टम की खामी ही ज्यादा जिम्मेदार है। कब्जों को लेकर शासन के दो विभागों का नजरिया अलग-अलग है। एक विभाग जहां नदी पर कब्जे की स्थिति मान रहा है, वहीं दूसरा इसे साफ नकार रहा है। ऐसी ही विसंगतियों की वजह से मामले लंबित रहते हैं और कब्जे साल दर साल बने रहते हैं।
मुरादाबाद दिशा से बदायूं आकर रामगंगा में मिलने वाली सोत नदी का फाट बिसौली और बिल्सी क्षेत्र में 45 से 53 मीटर तक चौड़ा है तो बदायूं में लालपुल के आसपास यह मात्र 15 मीटर ही चौड़ा रह जाता है। अतिक्रमण का आलम यह है कि इस चौड़ाई में भी बरसात के अलावा नदी दिखाई नहीं देती। इसके बावजूद राजस्व विभाग के रिकार्ड में नदी पर कोई कब्जा नहीं है। जनसूचना और अन्य माध्यम से जारी विभाग की रिपोर्ट साफ कहती हैं कि नदी तो सात मीटर चौड़ाई में ही बह रही है, उसके लिए पंद्रह मीटर का फाट छूटा हुआ है। हालिया कार्रवाई के बाद तत्कालीन सीडीओ की जिस सकारात्मक रिपोर्ट का हवाला आबिद रजा दे रहे हैं, उसका आधार भी सदर तहसील की यही रिपोर्ट रही है। तत्कालीन लेखपालों की नापजोख से तैयार और तहसीलदार से अधिकृत यह रिपोर्ट कमिश्नर के दफ्तर तक भेजी गई जिसमें कोई कब्जा न होने का दावा किया गया है।
वहीं, बाढ़ खंड और विनियमित क्षेत्र के रिकार्ड में सोत नदी पर कब्जे किए गए हैं। वर्ष 1957 में जारी गजट के मुताबिक नदी के किनारों से इधर और उधर 30 मीटर तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। विनियमित क्षेत्र ऐसे भवनों का नक्शा पास नहीं करता और वह अवैध संपत्ति होते हैं। जाहिर है कि विनियमित क्षेत्र से पूर्व विधायक के इस मैरिज हॉल का नक्शा भी अस्वीकृत हो चुका है और उसी आधार पर इस भवन को अवैध घोषित किया गया है।
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वर्जन....
विनियमित क्षेत्र किसी भी लो लैंड एरिया (नदी के जलभराव वाले स्थान) का नक्शा पास नहीं करता। पूर्व विधायक आबिद रजा के इस मैरिज हॉल का नक्शा भी इसीलिए रिजेक्ट कर दिया गया। सीडीओ, एसडीएम आदि अफसरों वाली उस कमेटी में मैं भी शामिल था, जिसने इस प्रकरण की सुनवाई की। इसमें पूर्व विधायक के पक्ष को भी सुना गया। निष्कर्ष में भवन अवैध निकला तो कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
- राजकुमार द्विवेदी, नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र
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वर्जन
हम अतिक्रमण के मामले में कई बार नापजोख कर चुके हैं। राजस्व विभाग के रिकार्ड के मुताबिक नदी की धारा किसी तरह प्रभावित नहीं हो रही है। चूंकि यह नदी नियमित नहीं है। यह कहीं ज्यादा तो कहीं कम बहती है। रास्ते में कई जगह तो किसान नदी क्षेत्र में खेती कर रहे हैं। इस लिहाज से बदायूं में नदी की चौड़ाई को लेकर कोई सवाल नहीं है। यहां सात मीटर में नदी बह रही है तो सात मीटर जगह खाली पड़ी है। हां, बाढ़ खंड के मानक के हिसाब से कब्जे की स्थिति हो सकती है।
- आरपी चौधरी, तहसीलदार