तीन प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने की संस्तुति
बदायूं। विकासखंड जगत के खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) सोमनाथ विश्वकर्मा ने कई स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। रंगाई-पुताई नहीं होने और अन्य खामियां मिलने पर तीन प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने की संस्तुति की।
बीईओ सोमनाथ विश्वकर्मा ने सबसे पहले गांव नाई स्थित एक निजी स्कूल को चेक किया। यहां पर बारीकी से सभी कागजात देखे। कमियां मिलने पर प्रधानाध्यापक और प्रबंधक को दूर करने के निर्देश दिए। पता चला कि विद्यालय की मान्यता प्राइमरी तक की है और कक्षाएं इंटर तक की चलाई जा रहीं हैं। यहीं के प्राथमिक स्कूल के निरीक्षण में 11 बजे पंजीकृत 161 में 113 बच्चे मौजूद मिले। विद्यालय में रंगाई-पुताई नहीं कराई गई थी, साथ ही टीएलएम नहीं बनवाया गया था। न ही समय सारिणी और पाठ्यक्रम मिला। प्रधानाध्यापक का वेतन रोकने की संस्तुति की गई। उच्च प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत 114 में 78 बच्चे उपस्थित मिले। फल का वितरण नियमानुसार नहीं पाया गया। प्रधान को फल का वितरण नियमानुसार कराने को कहा गया। दिन में 11.45 बजे बीईओ ने प्राथमिक स्कूल गौसपुर का निरीक्षण किया। जहां प्रधानाध्यापक देवेंद्र कुमार बिना सूचना के गायब थे। न ही रंगाई-पुताई कराई गई थी और भी कई अव्यवस्थाएं मिलीं। इस पर प्रधानाध्यापक का वेतन रोकने की संस्तुति की गई। शिक्षक जगदीश सिंह अकेले ही शिक्षण कार्य करते मिले। दो बजे यहां स्थित एक निजी स्कूल का निरीक्षण किया गया। सोमनाथ विश्वकर्मा ने बताया कि स्कूल एक ही कक्ष में संचालित था। प्राइमरी की मान्यता को फाइल दी गई थी, उसमें दर्शाए गए शिक्षकों के स्थान पर दूसरे मिले। प्राथमिक स्कूल जाटव गौटिया में शिक्षिका स्वाति सिंह नदारद मिलीं। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस स्कूल में भी रंगाई-पुताई नहीं कराई गई थी और कई कमियां मिलीं। पंजीकृत 71 में 44 बच्चे मौजूद थे। जबकि एमडीएम के अभिलेख में 53 दर्शाए गए थे। यहां की प्रधानाध्यापिका सावित्री देवी का वेतन रोकने की संस्तुति की गई। दोपहर 2.45 बजे प्राथमिक स्कूल रजागंज में प्रधानाध्यापिका कल्पना स्कूल आने के बाद अवकाश प्रार्थना पत्र रखकर चलीं गईं। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।