बदायूं। शहर में रोडवेज स्टैंड गेट से बरेली और कासगंज तक फर्जी रोडवेज बसों का संचालन और दूसरे रूटों पर हो रही डग्गामारी खत्म करने को अधिकारियों ने जबर्दस्त पहल की है। संयुक्त अभियान के बाद एआरटीओ ने निर्देश दिया है कि बरेली जाने वाली रोडवेज की बसों को अब रोडवेज बस स्टैंड के बाहर उसी जगह से संचालित किया जाएगा जहां खड़ी होकर निजी बसें मुसाफिरों को बैठाती हैं। फर्जी बसों और डग्गामार वाहनों पर अमर उजाला की खबरों के बाद प्रशासन के निर्देश पर यह संयुक्त कार्रवाई की गई है।
डिपो के गेट और बाउंड्री से सटाकर जबर्दस्त तरीके से डग्गामारी की जा रही है। गेट के सामने होटल के नीचे से बरेली को रोडवेज बसों के कलर और टिकट वाली बसें संचालित हो रही हैं तो साइड से दातागंज और अन्य स्थानों के लिए मैक्स और टाटा मैजिक में मुसाफिरों को ठूंसकर भरा जाता है। कई बार तो इन वाहनों का स्टाफ रोडवेज परिसर के अंदर से मुसाफिरों को जबरन खींचकर अपने वाहनों तक ले जाता है। रोडवेज स्टाफ अगर इनसे कुछ कहता है तो यह लोग झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। गुरुवार को एआरटीओ प्रवर्तन अमिताभ राय, एआरएम राजेश कुमार ने दोपहर बाद रोडवेज स्टैंड के बाहर खड़े वाहनों पर कार्रवाई को छापा मारा। अधिकारियों को दलबल के साथ देखकर नकली रोडवेज बसें और डग्गामार वाहन भाग निकले। अधिकारी करीब एक घंटा तक चौराहे पर घूमते रहे। इस दौरान एआरटीओ श्री राय ने एआरएम से कहा कि वह बरेली और कासगंज दिशा में जाने वाली रोडवेज बसों को होटल के नीचे और डिपो के गेट पर खड़ा कराएं। जब जगह ही नहीं बचेगी तो डग्गामार वाहन कहां खड़े होंगे। इसके बाद भी कोई वाहन दिखे तो उन्हें और पुलिस को तत्काल सूचना देकर उसे सीज कराएं।
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विरोध जताने आए पुलिसवाले खिसके
जब डग्गामार वाहनों को खदेड़ने के बाद अधिकारी अंदर चले गए तो डिपो इंचार्ज असलम आदि डिपो गेट पर खड़े थे। इस दौरान दो सिपाही आए और इस बात पर नाराजगी जताई कि प्राइवेट वाहन आखिर डिपो के बाहर क्यों खड़े नहीं होंगे। डिपो स्टाफ ने विरोध किया तो सिपाहियों से हल्की नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिसवाले चले गए। दोनों वर्दी तो पहने थे पर इनके नेमप्लेट नहीं लगी थी। यहां कुछ पुलिस वालों के संरक्षण में ही डग्गामारी हो रही है। कई बार परिवहन अधिकारियों ने डग्गामारों को खदेड़ने का प्लान बनाया पर पुलिस कृपा से संचालन बरकरार रहा।
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हमने फिलहाल कुछ रोडवेज बसें डिपो के बाहर खड़ी करने का निर्णय लिया है। हमें पता है कि यह नियमविरुद्ध है पर डग्गामारी रोकने का इससे कारगर विकल्प फिलहाल दूसरा नहीं सूझ रहा। समस्या का निस्तारण हुआ तो बसें फिर अंदर खड़ी की जाएंगी।
- अमिताभ राय, एआरटीओ प्रवर्तन