बदायूं। गर्मी का मौसम चल रहा है। ऐसे में ग्रामीण अंचलों में सरकार की ओर से मनरेगा के तहत तालाबों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसका कितना लाभ हुआ, यह आज की स्थिति देखकर बखूबी पता चल जाता है। ग्राम पंचायतों में तालाब तो बने, लेकिन सूखे पड़े हैं। इसके अलावा कहीं तालाबों पर कब्जा कर लिए गए तो कहीं गंदगी से पट गए। प्रशासन की मानें तो तीन सौ तालाबों को कब्जा मुक्त कराया गया, लेकिन वास्तविकता ये है कि आज भी कई तालाब माफिया के कब्जों से मुक्त नहीं हो पाए हैं।
शासन की ओर से 2007-08 में मनरेगा योजना को शुरू किया गया था। योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्र में कच्ची मिट्टी के होने वाले काम कराए जाने थे। इस योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात ये थी कि जिस गांव में भी मिट्टी का काम होगा, तो उसी गांव के व्यक्ति को काम दिया जाए। वर्ष 2007-08 से लेकर अब तक जिले के गांवों में 667 तालाबों को खोदकर तैयार किया जा चुका है। इसमें पानी भरवाने और रखरखाव का काम ग्राम पंचायत का होता है। शुरू में तो उनके स्तर से तालाबों में पानी हर साल भरवाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे ग्राम पंचायतों ने तालाबों की ओर ध्यान देना बंद कर दिया गया। इसके बाद ग्राम पंचायत की मदद से माफिया ने तालाबों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। जिससे जिले में कई तालाब अपना अस्तिव ही खो गए।
शासन ने कब्जाई गईं जमीन मुक्त कराने के लिए एंटी भू माफिया स्क्वॉड का गठन भी किया है। जिला प्रशासन की मानें तो इस टीम द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों से करीब तीन सौ तालाबों को कब्जा मुक्त कराया गया, साथ ही कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई और कुछ लोगों को जेल भी भेजा गया। इसके बाद कब्जा करने की घटनाओं में तो कमी आई, लेकिन अधिकांश तालाबों की हालत जस की तस रही। हालांकि बाद में कुछ तालाबों को जीर्णोद्घार कराकर उनकी हालत को सही कराया गया।
धरातल पर काम नहीं दिख रहा
अगर अभिलेखों की बात करें तो जिले में स्थित तालाबों के हालात एकदम बेहतर है। किसी भी तालाब पर अभी कोई कब्जा नहीं है। अधिकांश तालाबों में पानी भरा हुआ है। तालाबों के चारों ओर घास लगी हुई है। लोगों के बैठने के लिए वहां पर बेंच पड़ी हुई है, लेकिन धरातल पर हालात कुछ और ही बयां कर रहे है। अधिकांश तालाब सूखे हैं और गंदगी से भरे पड़े हैं।
शहर के तालाब पटे, कहीं प्लॉटिंग तो कहीं डलाव घर बना
- किसी जमाने में शहर में कई तालाब थे। बुजुर्गों का कहना है कि शहर के इन तालाबों में पानी भी था, लेकिन वक्त के साथ ये सूखते गए, और उसके बाद इन्हें पाट लिया गया। तालाब पटने के बाद उन पर कब्जे हुए और फिर इमारतें खड़ी कर ली गईं। शहर के बरेली रोड, इंदिरा चौक, लावेला चौक से शिव मंदिर रोड, चंदोखर गौटियां, लोचीनगला, ब्राह्मपुर आदि स्थानों पर तालाब थे, लेकिन वक्त के साथ इनका अस्तित्व खोता चला गया। अब यहां पर या तो इमारतें नजर आती हैं या फिर गंदगी के ढेर। ले देकर खेड़ा नवादा स्थित सागर ताल में पानी जरूर नजर आता है।
पिछले साल डीएम ने किया था काफी प्रयास
-लेकिन पिछले साल डीएम दिनेश कुमार सिंह ने तालाबों के जीर्णोद्घार के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। इसके तहत पिछले साल जिले को 250 तालाबों का लक्ष्य दिया गया था। लक्ष्य के अनुसार गांव तय कर डीएम ने वहां पर तालाबों की खुदाई शुरू करवाई और उनमें पानी भरवाया, ताकि जिले में जानवरों को परेशानी न हो। कुछ 667 तालाबों की अपेक्षा इनकी हालत अब भी कुछ सही है।
कुल ग्राम पंचायत-1038
कुल तालाब-667
पिछले साल बनाए गए तालाब-250
कब्जा मुक्त कराए तालाब-300
गर्मी के मौसम में जानवरों को पानी के लिए इधर उधर नहीं भटकना पड़े, इसके लिए तालाबों में पानी भरवाया जा रहा है। डीएम ने बैठक लेकर जलनिगम और संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां नहर, नलकूप या अन्य संसाधन हैं, वहां पर एप्रोच मार्ग के माध्यम से तालाबों को भरवाया जाए।
-राम सागर यादव, उपायुक्त, श्रम रोजगार