बदायूं। शहर की नगर पालिका को न तो जनता की समस्या दिखाई देती हैं और न ही समझ आती हैं, लेकिन यहां की पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी भी कुछ कम नहीं है। एक दूसरे को जिम्मेदार बताकर बस अपने सिर से बला टाली जा रही है। पुलिस नगर पालिका का काम बताकर अपना पल्ला झाड़ लेती है तो प्रशासनिक अधिकारियों को ‘और भी काम’ हैं। नगर पालिका की तो पूछिये ही मत। अगर कब्जा खत्म हो गया तो नगर पालिका की अप्रत्यक्ष आय ही बंद हो जाएगी। ऐसे में जनता का दर्द समझे भी तो कौन? फुटपाथ किसके लिए हैं? यह प्रश्न अचानक ही खड़ा नहीं हुआ है, क्योंकि पैदल चलने वाले रास्तों पर पूरी तरह दुकानदारों ने अतिक्रमण कर लिया है। कुछ दुकानदारों ने फुटपाथ पर तख्त डालकर, तो कुछ ने स्लैब लगाकर पूरा ही कब्जा लिया है। इस वजह से पैदल यात्रियों के लिए कोई जगह ही नहीं बचती। इंदिरा चौक से लेकर गांधी ग्राउंड रोड पर तकरीबन सभी दुकानदारों ने फुटपाथ पर अतिक्रमण कर रखा है। छह सड़का से घंटाघर रोड पर तो हाल ही बुरा है। यहां व्यापारियों ने अपनी पूरी की पूरी दुकान ही फुटपाथ पर सजा रखी है।
दरअसल, ये फुटपाथ केवल पैदल चलने वाले लोगों के लिए बनाए गए थे, ताकि वे दुर्घटना से अपने आपको बचाकर सुरक्षित चल सकें, लेकिन आलम यह है कि इन पर दुकानदारों के कब्जे हो गए हैं। अतिक्रमण के कारण इंदिरा चौक व छह सड़का पर तो लगभग हमेशा ही जाम की स्थिति बनी रहती है। पालिका प्रशासन की मिलीभगत व लापरवाही के चलते फुटपाथ पर व्यापारियों ने अपना हक समझते हुए अस्थायी दुकानें बना ली हैं। अब न तो पुलिस ही इस ओर ध्यान दे रही है न ही प्रशासन। ऐसे में जनता अपनी समस्या कहे भी तो किससे?