दातागंज। सिमरिया गांव वालों से गंगा मइया शायद रूठ गई हैं। बाढ़ तो थम गई, लेकिन गंगा मइया शांत नहीं हो रही हैं। अब तक दस गांव रामगंगा में समा चुके हैं। प्राथमिक विद्यालय रामगंगा की धार में बह गया। तीन घरों का कटान जारी है। रामगंगा का विकराल रूप देख सिमरिया वाले दहशत में हैं। कई परिवार खेतों में खुले में आसमान के नीचे पन्नी तानकर रह रहे हैं।
सिमरिया गांव तहसील दातागंज क्षेत्र में रामगंगा किनारे बसा है। यहां रहने वाले हर साल बाढ़ की मार झेलते हैं। मगर इस बार रामगंगा का प्रकोप ज्यादा बढ़ गया। बाढ़ खत्म होने के बावजूद ग्रामीणों की समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। रामगंगा की धार का सीधा रुख सिमरिया गांव की ओर हो गया है। पानी की धार के साथ कटान हो रहा है। तीन सप्ताह पहले बाढ़ खंड विभाग ने सिमरिया गांव को बचाने के लिए रेत भरे कट्टे लगाकर अस्थायी ठोकर बनाई थी, जो रामगंगा की तेज धार से कट गई। रामगंगा की धार 20-25 मीटर सिमरिया गांव की ओर बढ़ गई, जिससे गांव में बने घर कटने लगे हैं। सिमरिया गांव के मुख्य मार्ग पर बना प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह कटकर रामगंगा में समा गया। सिमरिया के रहने वाले रामपाल, लालाराम, जगराम, भगवानदास, सुखपाल, मनोज, विनोद, ओमपाल, सत्यपाल और धर्मपाल के घर कटकर पूरी तरह रामगंगा में समा गए। ऋषिपाल, छोटे और मलखान के मकान कटान की चपेट में हैं। ये अपने परिवार खेतों में पन्नी तानकर रह रहे हैं। प्रधान ओमपाल कश्यप ने बताया कि तीन दिन पहले बाढ़ खंड के अधिकारी जायजा लेने आए थे, लेकिन कई बार फोन करने के बाद भी कोई अधिकारी गांव वालों की सुध लेने नहीं आया।