अटल जी के न रहने का बदायूं की तीन बहनों को है बेहद दुख
बदायूं आने पर तीनों बहनों ने किया था अटल का तिलक लगाकर स्वागत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। यह वाकया 1971 का है, जब अटलजी भारतीय जनसंघ से जुड़े थे। वह संगठन को मजबूत करने के लिए देश के कोने-कोने में जा रहे थे। उस वक्त बदायूं में चंद लोग ही जनसंघ से जुड़े थे, जिनमें कृष्णस्वरूप वैश्य भी शामिल थे। उन्हीं के रिश्ते के भाई शिवनारायण वैश्य भी थे। अटलजी जब बदायूं आए थे तब शिवनारायण वैश्य की तीन बेटियों ने उनका तिलक लगाकर स्वागत किया था। जब अटलजी इस दुनिया से हमेशा-हमेशा को चले गए हैं तो उन तीनों बहनों को भी बेहद दुख हैं। उनका कहना है कि उस समय उनके जेहन में एक बार को भी यह नहीं आया था कि उनके मुंह बोले भाई अटलजी की पूरी दुनिया में गूंज होगी। उनके निधन से मानों भारत का सच्चा सपूत हमेशा को सवा सौ करोड़ जनता को रोता छोड़ गया है।
इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो कांग्रेस का पूरे देश पर एकक्षत्र राज था। भारतीय जनसंघ से जुड़े अटल बिहारी वाजपेयी अकेले ही कांग्रेस के विरोध में खड़े थे। वह इस प्रयास में लगे थे कि भारतीय जनसंघ एक दिन भारत की बड़ी पार्टी बने। सो इसके लिए अटल जी संगठन से जुड़े हर कार्यकर्ता से दिल का रिश्ता रखते थे। वह खाना भी कार्यकर्ता के घर पर ही खाते थे। 1971 में जब वह बदायूं आए थे तब उन्होंने संघ से जुड़े रहे शिवनारायण वैश्य के यहां ही भोजन किया था। श्री वैश्य के बेटे अवनींद्र कुमार ने बताया कि जब अटलजी उनके यहां पर भोजन कर रहे थे तब वह दूर से ही उन्हें देख रहे थे। बड़ी बहन रेखा गुप्ता पत्नी उमेश चंद्र, दूसरी बहन निधि वैश्य पत्नी सुनील गुप्ता और मधु पत्नी ब्रजगोपाल ने अटलजी का टीका लगाकर और पुष्प अर्पित कर स्वागत किया था।
अवनींद्र ने कहा कि अटलजी के निधन की खबर से उनकी तीनों बहनों को काफी दुख है। बोले-अटल जी वास्तव में एक महान व्यक्तित्व के धनी थे। निश्चित तौर पर भारत ने एक महान नेता ही नहीं बल्कि सच्चा सपूत खो दिया है जिसे देश की जनता हमेशा अपने दिलों में याद रखेंगी।