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कछला गंगाघाट पर पुलों के
पास नहाइए पर संभलकर
कछला में कांवड़ियों के डुबकी लगाने को चार घाट हुए तैयार
नहाने के लिए उत्तरी छोर का पहला स्थायी घाट सबसे सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। कछला गंगाघाट पर कांवड़ियों के लगने वाले जमावड़े को देखते हुए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। कांवड़ियों के नहाने को इस बार उत्तरी और दक्षिणी छोर पर चार घाट बनाए गए हैं। इनमें उत्तरी छोर वाला घाट सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। मगर दोनों पुलों के पिलर के पास नहाना बेहद खतरनाक रहेगा।
नगर पंचायत प्रशासन और राजस्व कर्मियों ने बुधवार को कांवड़ियों की सुविधानुसार उत्तरी और दक्षिणी छोर पर चार घाटों का चयन किया। उत्तरी छोर का पहला घाट स्थायी है तो इसी छोर का दूसरा अस्थायी। दक्षिणी छोर के दोनों घाट अस्थायी हैं। इन चारो घांटों पर बैरीकेडिंग का काम शुरू कर दिया गया है। पालिका कर्मियों में वरिष्ठ लिपिक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि घाटों पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है जो कांवड़ियों के अनुरूप हो। गुरुवार से चारों घाटों पर बल्लियां गाड़ कर बैरीकेडिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। शुक्रवार शाम तक घाटों पर सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। गंगाघाट के जानकारों की माने तो रेलवे और हाईवे पुल के पिलरों के आसपास गहराई अधिक है। जलस्तर में गहराई का आकलन करना मुश्किल होता है। नगर पंचायत ने भी दोनों पुल के पास लाल झंड्डियां लगाने का निर्णय किया है। ताकि कांवड़ियों के स्नान के दौरान हादसे की आशंका कम रहे। -------------
जलस्तर में उतार-चढ़ाव से घाटों का भूगोल होगा प्रभावित
उझानी। सावन में गंगा में बाढ़ का प्रकोप भी रहता है। पहाड़ी क्षेत्र में बारिश अधिक हुई तो भी गंगा में बाढ़ आएगी। इलाके में झमाझम पानी पड़ा तो भी बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। दोनों ही स्थिति में घाटों का भूगोल प्रभावित होना लाजिमी है। बताते हैं कि प्रशासन बाढ़ के मद्देनजर ही इंतजाम करेगा। जलस्तर में गिरावट होने पर बल्लियों को उखाड़ कर फिर से अंदर की ओर गाड़ना पड़ेगा। क्योंकि कांवड़िये भी कमर तक जलस्तर में गंगा स्नान करने को वरीयता देते हैं।
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कांवडियों के भेष में घूमेंगे पुलिस कर्मी
उझानी। कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे से लेकर घाट तक पुलिस प्रशासन ने अब तक जो रणनीति तय की है, उसमें यह भी शामिल है कि कांवड़ियों के बीच में ही रहकर छोटी-छोटी बातों को बतंगड़ बनने से रोका जाए। इसके लिए पुलिस कर्मियों को वर्दी की बजाय भोले की ड्रेस मुहैया कराके उन्हें कांवड़ियों के बीच रखा जाएगा। भोले की ड्रेस में पुलिस कर्मी कांवड़ियों को आसानी से समझाकर माहौल बिगड़ने से बचा सकते हैं। दो साल पहले भी पुलिस ने इस फार्मूले का सहारा लिया था।