बदायूं। प्रदेश में डॉक्टरों की अच्छी खासी कमी है। जल्द ही एक हजार डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दवाओं की कमी भी जल्द पूरी हो जाएगी। यह जानकारी लखनऊ से आए मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुरेश चंद्र ने दी।
बुखार से हो रही बच्चों की मौत के बारे में निदेशक डॉक्टर सुरेश चंद्र ने कहा कि पिछले सालों की अपेक्षा करने वालों का आंकड़ा घटा है। बारिश में संक्रामक बीमारियां बढ़ती हैं। इसकी शुरुआती तैयारी की गई थी। अब स्वास्थ्य टीमें गांव-गांव जाकर चेकअप कर रही हैं। सीएमओ को खुद गांव में जाने के निर्देेश हैं।
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जिला महिला अस्पताल का किया निरीक्षण
निदेशक डॉ. सुरेश चंद्र ने जिले में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले दातागंज और इसके बाद समड़ेर सीएचसी का निरीक्षण किया। दातागंज में टॉयलेट नहीं है, जिसे शीघ्र बनवाने के निर्देश दिए। दोपहर करीब एक बजे निदेशक डॉ. सुरेश जिला महिला अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने लेबर रूम और सघन नवजात शिशु चिकित्सा कक्ष देखा। अस्पताल परिसर में बंदरों को देख कक्ष के गेट पर जालीदार दरवाजा लगाने का निर्देश दिया। भर्ती शिशु को अलग-अलग रंग की तौलिया इस्तेमाल करने को कहा। इस अवसर पर सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा, जिला महिला अस्पताल की सीएमस डॉ. रेखा रानी, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव रोहतगी मौजूद रहे।
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102 एंबुलेंस पर होगी कार्रवाई
निदेशक डॉ. सुरेश ने बताया कि 102 एंबुलेंस चालकों की लापरवाही की शिकायतें मिल रही हैं। उन्हें संचार में सुधार लाने को कहा गया है। जल्द सुधार नहीं हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।
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प्रसव अस्पताल में कराएं
निदेशक डॉ. सुरेश ने कहा कि प्रसव सरकारी या किसी प्राइवेट अस्पताल में ही कराना चाहिए। इससे मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहते हैं। जन्म के बाद छह माह तक शिशु को स्तनपान कराना जरूरी है।