बदायूं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में 1500 नई समूह सखी बनाने का लक्ष्य शासन से मिला है। वर्तमान में जिले में करीब एक हजार समूह सखी काम कर रही हैं। नए लक्ष्य के पूरा होने के बाद जिले में समूह सखियों की संख्या 2500 हो जाएगी।
15 स्वयं सहायता समूह पर एक समूह सखी की तैनाती की जाती है। समूह सखी गांव की ही शिक्षित महिला होती है, जो समूहों का गठन, बचत, बैंक लिंकेज, ऋण वितरण और रिकॉर्ड मेंटेन करने में मदद करती है। साथ ही समूह की महिलाओं को सिलाई, ब्यूटीशियन, डेयरी, मसाला उत्पादन जैसी आजीविका गतिविधियों से जोड़ती है।
जिला मिशन प्रबंधक अमित के मुताबिक, समूह सखी बनने के लिए महिला का उसी गांव की निवासी होना, 10वीं पास होना और स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य होना जरूरी है। चयन के बाद इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। समूह सखियों को हर माह मानदेय के साथ प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में तेजी आएगी और मिशन के लक्ष्यों को समय से पूरा करने में मदद मिलेगी।