बदायूं। चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए डीएम ने चिकित्साधिकारियों और स्टाफ पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। लक्ष्य के अनुसार संस्थागत प्रसव न कराने वाली 11 आशाओं की सेवा समाप्त करने के निर्देश डीएम ने दिए हैं, वहीं चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए कि संविदा के आधार पर रखे गए चिकित्सकों का भी स्थानांतरण किया जाए। सेवानिवृत्ति के बाद सीएचसी, पीएचसी के आवासों में वर्षों से जमे कर्मचारियों से आवास भी खाली कराए जाएंगे।
सोमवार को कलक्ट्रेट में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक डीएम की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने पाया कि 43922 संस्थागत प्रसवों में से अब तक 36809 प्रसूताओं का ही भुगतान किया गया है। ककराला स्थित सीएचसी में लक्ष्य के सापेक्ष कम संस्थागत प्रसव होने पर डीएम ने एमओआईसी भुवनेश कुमार से कड़ी नाराजगी जताई। बैठक के दौरान पता चला कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 12510 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर चिकित्सा इकाइयों को रेफर किया था। अब तक 8100 बच्चों का इलाज किया गया। 4410 बच्चों का अब तक इलाज नहीं हो सका, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध आंकड़ों में इलाज से वंचित बच्चों का कोई भी अता-पता नहीं है। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई।
डीएम ने शेखूपुर, बिनावर, रसूलपुर, जगत और कुवंरगांव की चिकित्सा इकाइयों की अतिरिक्त स्टाफ नर्स को तुरंत ही दूसरे स्थानों पर स्थानांतरण करने के आदेश दिए। इस मौके पर सीडीओ निशा अनंत, एडीएम एफआर महेंद्र सिंह, सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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इन आशाओं की सेवाएं होंगी समाप्त
बिसौली की सीएचसी के गांव धरैरा की आशा साधना, गांव भानपुर की राधा, गांव अहरौला की रचना, गांव आलमपुर की प्रीति, गांव सिचौली की नीलम, गांव रंपुरिया की कृष्णा और आसफपुर सीएचसी के अटैचल गांव मुंसिया नगला की अमलेश, गांव सीकरी की नमिता, गांव सिरसावा की नीतू, गांव संग्रामपुर की रिजवाना और गांव दबतोरी की सुमन देवी।