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नौ लाख रुपये की मलेरिया दवा पी गए मच्छर

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मलेरिया विभाग में नौ लाख चूस गए मच्छर
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कागजों में कर दिया गया दवा का छिड़काव, बुखार ने कहर बरपाया तो खुली पोल
वर्ष 2017 में शासन ने मुहैया कराई थी रकम, पहले से किया था अलर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले में फैले बुखार ने मलेरिया विभाग की पोल खोल दी है। विभाग ने दवा का छिड़काव करने के नाम पर नौ लाख रुपये खत्म कर दिए, मगर मच्छर भी मरे नहीं। इसका परिणाम यह हुआ कि जिले में वायरल, मलेरिया और फैल्सीपेरम फैल गया। बुखार अब तक 141 लोगों की जान ले चुका है।
वर्ष 2016 में बुखार से दर्जनों लोगों की मौत हुई थी। तब भी जिले में हालात बेकाबू हो गए थे। इस पर शासन ने चिंता व्यक्त करते हुए पूरे इलाके में डीडीटी (डाई क्लोरो डाई फिनाइल ट्राई क्लोरो एथीन) दवा का छिड़काव कराने के आदेश दिए गए थे। कहा गया था कि वर्ष 2017 में बुखार फैलने से पहले दवा का छिड़काव किया जाए। इसके लिए शासन ने मलेरिया विभाग को करीब 14 लाख रुपये मुहैया कराए थे। इसमें सिर्फ छिड़काव में नौ लाख रुपये खर्च करने थे। परंतु उस धन का पता ही नहीं चला कि आखिर कहां और कैसे छिड़काव हो गया। आज जिन इलाके में बुखार फैला है। उन गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जाना शुरू किया। बुखार फैलने के कारणों का पता किया, तो मलेरिया विभाग की पोल खुल गई। किसी भी गांव में पुष्टि नहीं हुई कि उनके गांव में डीडीटी का छिड़काव हुआ। इधर, स्वास्थ्य विभाग मान रहा है कि अगर उस दौरान डीडीटी दवा का छिड़काव हो गया होता तो शायद आज जिले में बुखार रूपी महामारी नहीं फैली होती। लोगों को अपनी जान गवांनी नहीं पड़ती।
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अगर नौ लाख रुपये की धनराशि को छोड़ दें, तो भी जिले के प्रत्येक ग्राम प्रधान के खाते में 10-10 हजार रुपये डीडीटी दवा के छिड़काव के लिए आते हैं। शासन ने वर्ष 2018 की तैयारी भी होगी, दवा के लिए धन मुहैया कराया होगा। हालांकि इसके बारे में मलेरिया विभाग चुप है। कुछ बताने को तैयार नहीं है। परंतु सरकारी धन के बंदरबांट से आज 141 लोग बुखार से अपनी जान गवां चुके हैं। अगर जिला प्रशासन पहले से अलर्ट होता और मलेरिया विभाग को मिलने वाली रकम पर नजर रखता तो शायद घपलेबाजी नहीं होती, क्षेत्र में दवा का छिड़काव होता और लोगों की मौत नहीं होती।
इंसेट--
शहर में लगे थे कर्मचारी, गांव में कौन करता छिड़काव
-मलेरिया विभाग की एक बात और सामने आई है कि बरसात शुरू होने से पहले विभाग में कार्यरत दवा छिड़काव करने वाले 27 कर्मचारियों को शहर में तैनात कर दिया गया था। परंतु किसी कर्मचारी को गांव में डीडीटी दवा का छिड़काव करने नहीं भेजा गया। कर्मचारियों की भी मौज रही और अधिकारी के मस्त रहे।
इंसेट--
कहां रहे मलेरिया इंस्पेक्टर
-मलेरिया विभाग में शायद ही कोई कार्य होगा, जो कागजी नहीं है। कहने को मलेरिया विभाग में तीन मलेरिया इंस्पेक्टर तैनात हैं। इनमें एक की ड्यूटी सहसवान, दूसरे की दातागंज और तीसरे की ड्यूटी अर्बन में तैनाती दिखाई गई। हकीकत में यह कहां रहे, जिले में फैले बुखार से ही पता चल रहा है।
वर्जन--
हमारे पास कोई पैसे नहीं आए थे। 10-10 हजार रुपये प्रधानों के खाते में जरूर जाते हैं। प्रधान ही अपने-अपने गांव में छिड़काव कराते हैं। उसके बाद प्रधान अपनी रिपोर्ट भेजता है। रिपोर्ट से पता चलता है कि गांव में छिड़काव हुआ है।
वीके शर्मा, जिला मलेरिया अधिकारी
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दूसरे डॉ. आशाराम निकले एमओआईसी जगत
आसफपुर और जिले की टीम ने संभाला मोर्चा
फोटो--16
अमर उजाला ब्यूरो
मूसाझाग (बदायूं)। संवेदनशील ब्लॉक क्षेत्र में फैले बुखार के एमओआईसी डॉ. पवन कुमार भी कम जिम्मेदार नहीं है। सूत्रों की माने तो दो सप्ताह से जगत क्षेत्र में बुखार फैला है। शुरूआत भी इसी ब्लॉक क्षेत्र से हुई थी, लेकिन एमओआईसी ने सीएचसी से बाहर कदम नहीं रखा और न ही बुखार कंट्रोल करने के लिए कोई प्लान किया। वह तो गनीमत रही कि जिला स्तर और आसफपुर की टीम क्षेत्र में भ्रमण करती रही।
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जगत ब्लॉक क्षेत्र में करीब दो सप्ताह से बुखार फैला है। अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसी ब्लॉक क्षेत्र की बात करें तो अब तक करीब 30-35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। आसपास के गांव वालों की माने तो जगत एमओआईसी डॉ. पवन कुमार जब भी दिखे, सीएचसी पर ही दिखे। उन्होंने क्षेत्र में कभी भ्रमण नहीं किया और न ही बुखार रोकने के कोई इंतजाम किए। अगर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी पहले से अलर्ट होते तो शायद यह बुखार जगत क्षेत्र से निकलकर दूसरे ब्लॉकों में नहीं पहुंचता। एमओआईसी निलंबित सीएमओ डॉ. आशाराम की तरह जिम्मेदारी निभाते रहे। अगर उन्होंने थोड़ी सी जिम्मेदारी निभाई होती तो शायद आज स्वास्थ्य विभाग को इतनी परेशानी नहीं होती और बुखार से मरने वालों के परिवार में चीत्कार नहीं मच रही होती।
वर्जन--
यह आरोप गलत है कि हम क्षेत्र में भ्रमण करने नहीं गए। हमने तो टीम के साथ कई गांव के हालात देखे और दवा भी वितरित कराई। आज भी हमारे साथ टीम है।
डॉ. पवन कुमार, एमओआईसी जगत
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