पौने दो साल बाद मेडिकल कॉलेज को मिले 21 करोड़
ऊंट के मुंह में जीरा है ग्रांट, मान्यता पर भी मंडरा रहा खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। सपा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट राजकीय मेडिकल कॉलेज सरकार बदलने से बदले माहौल में उपेक्षा के बुरे दौर से जूझ रहा है। पौने दो साल से इसे कोई ग्रांट नहीं मिली थी। अब 21 करोड़ का बजट मिला है। जबकि कई निर्माण कार्य यहां पर अधूरे पड़े हैं। एमसीआई से कॉलेज की मान्यता भी इसी वजह से अटकी पड़ी है।
उझानी रोड पर गिनौरा के पास राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण जारी है। वर्ष 2014 से इसका काम चल रहा है। तब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते अपने भाई बदायूं सांसद धर्मेंद्र यादव के क्षेत्र को यह बड़ा तोहफा दिया था। कुल 545 करोड़ के प्रोजेक्ट में करीब 367 करोड़ रुपये भी सपा सरकार ने जारी कर दिए थे। इससे यहां ओपीडी तैयार कराकर डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती कर दी गई। वहीं, इमरजेंसी सेवाएं और एकेडमिक ब्लॉक धन की कमी से शुरू नहीं हो सके। अस्पताल को आखिरी ग्रांट 11 मई 2016 को 10773 करोड़ की आई थी। इसके बाद चुनाव और फिर सरकार बदलने से मेडिकल कॉलेज के दुर्दिन शुरू हो गए। हाल ही में प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों के लिए शासन ने पांच अरब 45 करोड़ की ग्रांड जारी की थी। अब विशेष सचिव शमीम अहमद खान ने इस राशि में से बदायूं मेडिकल कॉलेज को 21 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 31 जनवरी को जारी निर्देश में उन्होंने स्पष्ट किया है कि रुपये निर्माण के उसी मद में खर्च किए जाएं, जिसमें आवंटित हुए हैं।
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कोट....
21 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी होने की सूचना मिली है। निर्माण निगम को यह धनराशि मिलेगी। प्रयास किया जाएगा कि पुराने देय निपटाने की बजाय इस धन से 300 बेड के अस्पताल की व्यवस्था ओके कर ली जाए जो आईएमसी से मान्यता के लिए ज्यादा जरूरी है। एकेडेमिक ब्लॉक का निर्माण भी प्राथमिकता रहेगा।
- डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज