यूपी बोर्ड की वर्ष 2018-19 की वार्षिक परीक्षाएं सात फरवरी से शुरू होनी हैं। इसके लिए परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है। मगर इस साल की एक खास बात यह सामने आई है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पिछले साल की अपेक्षा करीब 14 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी कम हो गए हैं। निश्चित ही इससे यह साफ हो गया है कि शासन की मंशा के अनुरूप जिले में काम नहीं हुआ है।
प्रदेश सरकार हर साल स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के निर्देश जारी करती है। बच्चों के नामांकन कराने को अनेक तरह के कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं ताकि अभिभावक बच्चों का दाखिला कराएं। अधिकारियों को भी निर्देश दिए जाते रहे हैं कि वह नामांकन को रैलियों के साथ ही अन्य कार्यक्रम आयोजित कराएं। जूनियर यानि की कक्षा आठ पास होने वाले बच्चों का अगली कक्षा में दाखिला कराने की जिम्मेदारी बेसिक के अधिकारियों को दी गई । निर्देश थे कि वह यह भी देखें कि कितने बच्चों ने कक्षा आठ पास करने के बाद नवीं में दाखिला लिया है। नवीं पास करने के बाद ही बच्चे हाईस्कूल की परीक्षा में शामिल होता है। पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो हाईस्कूल में 35 हजार 622 और इंटरमीडिएट में 25476 संस्थागत और व्यक्तिगत परीक्षार्थी शामिल हुए थे। कुल 61 हजार 98 परीक्षार्थी थे। इस साल की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या गत वर्ष से 14 हजार 27 कम है।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल हाईस्कूल में 23 हजार 837 परीक्षार्थी शामिल होंगे। जो पिछले साल से 11 हजार 785 कम हैं। वहीं इंटरमीडिएट में इस साल 23 हजार 234 परीक्षार्थी परीक्षा में हिस्सा लेंगे। जो पिछले साल से दो हजार 242 कम हैं। इस साल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में व्यक्तिगत और संस्थागत 47 हजार 71 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे।
इस साल पिछले साल की अपेक्षा परीक्षार्थियों की संख्या कम हुई है। संख्या क्यों कम हुई इस बारे में भी पता लगाया गया। नकल नहीं होने की वजह से यह हुआ है। -राममूरत, डीआईओएस