उझानी (बदायूं)। पूस महीने में पारा अगर 21 को पार कर जाए तो लोगों को राहत जरूर मिल जाती है, लेकिन गेहूं का तो खेल ही खराब हो गया है। गेहूं के पौधों को 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत के बीच जिस तरह से कोहरे ने खुद को आसमान में ही समेट लिया, उससे तो यह लगता है कि बढ़वार प्रभावित होने के साथ ही पैदावार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बालियों के अंदर दाना भी सिकुड़कर आधा रह जाएगा।
रबी की फसलों में गेहूं का रकबा बहुतायत में होता है। यही एक ऐसी प्रमुख फसल है जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से मजबूती के साथ खानपान की जरूरतों को पूरा करती है। नवंबर महीना में बुआई के बाद गेहूं को दिसंबर अंत से लेकर पूरी जनवरी कम तापमान चाहिए। कोहरा भी पड़ना आवश्यक है, लेकिन इस बार कुछ दिन ही कोहरा पड़ा। तापमान भी 21 डिग्री के पार चला गया है। ऐसा इस वक्त है जब गेहूं के पौधों को बढ़वार के लिए अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चाहिए। किसानों की मानें तो गेहूं की फसल की सिंचाई करने मात्र से बढ़वार नहीं हो सकती। इसके लिए तो कुदरत का रहम भी अहमियत रखता है। गेहूं 135 से 145 दिन में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। तकरीबन 75 दिन की उम्र तक पहुंच चुके गेहूं की उम्मीद के अनुरूप बढ़वार नहीं होने से साफ है कि आने वाले दिनों मे बालियों के अंदर दाना सिकुड़कर आधा ही रह जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रति बीघा चार क्विंटल की पैदावार काफी मुश्किल होगी।
...पर फायदे में रहेगा ‘सब्जियों का राजा’
ठंड के दिनों में तापमान में वृद्धि से सब्जियों का राजा आलू झुलसा की चपेट में आने से बच गया। कोहरा अधिक पड़ने से ही आलू में बीमारियां बढ़ती हैं और कीट असर दिखाने लगते हैं। सरसों पर माहु का खतरा भी कम हो गया है। टमाटर, पत्ता गोभी और शिमला मिर्च के भी अच्छे दिन चल रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक भी कहते हैं कि आलू, सरसों, टमाटर, मटर और मिर्च के लिए जितना तापमान चाहिए, वही बना हुआ है।
गेहूं की फसल के मौजूदा तापमान काफी नुकसानदायक है। कोहरा कम पड़ने से चटक धूप पौधों की बढ़वार को प्रभावित कर रही है। हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि उत्पादन कितना गिरेगा, लेकिन तय है कि पैदावार पहले के मुकाबले कम जरूर होगी।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक