चौंक गए न डीएम साब: ऐसे ही होता है सरकारी धन का बंदरबांट
गुधनी में रखे कूड़ेदान की कीमत बताई 72 सौ रुपये, वास्तविक में है पांच से सात सौ रुपये मूल्य
नाराज डीएम ने भुगतान पर लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। गांव के विकास को आने वाली धनराशि का किस तरह दुरुपयोग या फिर कहें कि घोटाला किया जाता है यह डीएम दिनेश कुमार सिंह ने बुधवार को तहसील बिल्सी क्षेत्र के गांव गुधनी पहुंचकर खुद ही देखा। गांव में जो कूड़ेदान बनवाए गए हैं उनकी कीमत सुनकर डीएम भौचक्के रह गए। बताया गया कि एक कूड़ेदान की कीमत 72 सौ रुपये है, जबकि इसकी वास्तविक कीमत पांच सौ से सात सौ रुपये तक की है। लिहाजा, सरकारी धन हड़पने को किए गए इस कार्य पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए आदेश जारी किए हैं किसी दशा में उसका भुगतान नहीं किया जाए। चेताया यदि भुगतान हो जाता है तो उसकी वसूली प्रधान और सचिव से की जाए। डीएम की इस कार्रवाई से संबंधितों में खलबली मच गई।
शासन की मंशा गांवों को कस्बों की तरह बनाने की है। सो इसके लिए शासन द्वारा गांवों के विकास को खूब बजट भी दिया जा रहा है। गांव के विकास कार्यों की जिम्मेदारी प्रधान के साथ ही सचिव पर होती है। उन्हीं के संयुक्त खाते से विकास कार्यों को धनराशि खर्च की जाती है। बुधवार को गांवों में चल रहे स्वच्छता अभियान और विकास कार्यों का स्थलीय जायजा लेने को डीएम दिनेश कुमार सिंह बिल्सी तहसील के गांव गुधनी पहुंच गए। किसी व्यक्ति ने उनसे शिकायत कर दी कि डीएम साब जो कूड़ेदान बनवाए गए हैं उनकी कीमत काफी है। डीएम ने देखा कि 75 लीटर के आसपास के कूड़ेदान हैं। प्रधान और सचिव से जानकारी ली गई तो बताया कि उनकी कीमत 72 सौ रुपये है। यह सुनकर डीएम भी चौंक गए। पता चला कि वास्तविक कीमत तो पांच से सात सौ रुपये तक की है। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि 72 सौ रुपये की दर से किसी दशा में भुगतान नहीं किया जाए। डीएम ने बताया कि उन्होंने सभी बीडीओ को निर्देश दिए हैं कि इस धनराशि के हिसाब से कहीं पर भुगतान नहीं होना चाहिए। यदि कहीं पर भुगतान होता है तो प्रधान-सचिव से वसूली की जाएगी। इधर, पता चला है कि डीएम ने इस मामले को गंभीरता से लिया है वह अपने स्तर से जांच करा रहे हैं। लिहाजा, जांच होने के बाद घोटाले बाजों की दिक्कतें बढ़ सकतीं हैं।