05 बीडीएन 12, 13
गरीबों के घर शिक्षा की
ज्योति जला रहे आजाद
रिटायर हुए पर सेवा करने का जज्बा नहीं हुआ कम
सिरसाठेर के गरीब बच्चों को समझा अपना, शिक्षा के साथ मुफ्त में देते हैं कापी-किताबें
विकास बाबू सक्सेना
बदायूं।
यदि कुछ करने का जज्बा है तो उम्र भी आड़ेे नहीं आती। बाढ़ खंड विभाग से रिटायर्ड हुए आजाद चंद्र सक्सेना पिछले चार साल से गरीब बच्चों को उनके घर जाकर शिक्षा दे रहे हैं। वह सिरसाठेर गांव के सैकड़ों बच्चों को शिक्षित कर चुके हैं। वह शिक्षा के साथ गरीब बच्चों को अपने पास से कापी-किताबें भी देते हैं। वह गांव पहुंचते हैं तो बच्चे, बड़े सब उन्हें आदर से गुरुजी कहकर पुकारते हैं।
शहर की श्रीरामनगर कॉलोनी निवासी करीब 64 वर्षीय आजाद चंद्र सक्सेना बेहद ही मधुर स्वभाव के व्यक्ति हैं। वह किसी से भी मिलते हैं तो एक बार में ही सामने वाला व्यक्ति उनका मुरीद हो जाता है। बाढ़ खंड विभाग में तीन दशक से भी ज्यादा सेवा देेने वाले आजाद चंद्र सक्सेना वर्ष 2014 में वरिष्ठ सहायक के पद से रिटायर्ड हुए। इसके बाद उन्होंने तय किया कि अब वह गरीब बच्चों को पढ़ाएंगे। सो सेवानिवृत्त होने के कुछ समय बाद ही शहर में एक स्कूल खोल लिया। मगर कुछ लोगों की आलोचना के चलते स्कूल बंद करना पड़ा। फिर वह शहर से लगे गांव सिरसाठेर पहुंच गए। कुछ लोगों से उन्होंने संपर्क किया। बताया कि वह गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देंगे।
आजाद चंद्र सक्सेना कहते हैं कि वह तड़के पांच बजे उठकर गांव सिरसाठेर पहुंच जाते हैं। जो बच्चे पढ़ते हैं उन्हें खुद ही जगाते हैं। बच्चे भी पढ़ने को तैयार रहते हैं। बोले-इन चार सालों में वह सैकड़ों बच्चों को शिक्षा का बेसिक ज्ञान करा चुके हैं। अंग्रेजी उनका लोकप्रिय विषय रहा है सो बच्चों को अंग्रेजी की बारीकियां भी समझाते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा से ही लोगों को बदला जा सकता है। अच्छे बुरे का ज्ञान होता है। बच्चों को पढ़ाना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। किसी कारणवश वह गांव नहीं जाएं तो उन्हें ऐसा प्रतीत होता है मानो उनका क्या खो गया है।
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खुद के बच्चों की शिक्षा पर दिया ज्यादा ध्यान
बदायूं। आजाद चंद्र सक्सेना बताते हैं कि शिक्षा के बिना सब अधूरा है। सो उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा पर ही सबसे ज्यादा ध्यान दिया। बताया कि उनका बड़ा बेटा मोहित राज सक्सेना गुरुग्राम में साफ्टवेयर इंजीनियर है। पुत्रवधू नोएडा की एक कंपनी में एचआर डिपार्टमेंट में हैं। दूसरा बेटा शोभित राज सक्सेना एमबीए हैं और उसकी पत्नी नोएडा में साफ्टवेयर इंजीनियर है। तीसरे नंबर की बेटी प्रियंकाराज सक्सेना एमबीए है और बदायूं के एक सीए के यहां कार्यरत हैं। सबसे छोटा बेटा सुमित राज सक्सेना बीटेक करने के बाद नोएडा में सिविल इंजीनियर है।