बदायूं। दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मानसिक मंदित महिला के बच्चे को चोरी करने की कोशिश के मामले को अब स्वास्थ्य विभाग ही दबाने के प्रयास में है। शुरुआत में यह आरोप दातागंज पुलिस पर लगा था। कहा गया था कि विभाग की ओर से तहरीर दे दी गई है लेकिन पुलिस ही कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती लेकिन हद तो तब हो गई, जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने खुद बच्चा चोर का नाम उजागर किया और बाद में इस मामले को रफादफा करने का प्रयास किया।
अगर महिला मानसिक मंदित न होती तो शायद उसके बच्चे को चुराने की कोशिश करने वाले जेल में होते, फिर महिला भी उनका पीछा नहीं छोड़ती। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले को गंभीरता से लेता और पुलिस भी उसकी सुनती। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के ढीले पड़ने की वजह महिला की मानसिक स्थिति रही। इसका फायदा उठाते हुए उसके बच्चे को चोरी करने की कोशिश की गई। वह तो उसका नसीब अच्छा था, जिससे बच्चा चोरी का प्लान फेल हो गया।
आश्चर्य की बात तो यह है कि इस मामले की जांच स्वयं सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने शुरू की थी। उन्होंने एक-एक करके स्वास्थ्य केंद्र के सभी कर्मचारियों के बयान लिए थे। इस दौरान एक आशा वर्कर का नाम सामने आया था। यह भी आशंका जताई गई थी कि एक कर्मचारी भी मिला हुआ है। यहां तक कि इन कर्मचारियों की, जिसको बच्चा देना था, उससे बात हो गई थी। वह दंपती भी कहीं बाहर के नहीं थे, बल्कि कस्बे के ही रहने वाले हैं। इतना सबकुछ खुलासा होने के बावजूद मामले को दबा दिया गया। सीएमओ ने स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ को नोटिस भेजकर सिर्फ खानापूर्ति की, नहीं तो अब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ ने जवाब भी दे दिया होता और उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो गई होती।
-------------------------बड़ी आश्चर्य की बात है यह, इतना सबकुछ हो गया और यह खबर मेरे पास तक नहीं आई। जब सुुरक्षा तंत्र फेल हो जाता है, तब ऐसी घटनाएं होती हैं। मैं खुद इस मामले को देखती हूं। जांच में जो भी सामने आएगा, उसके मुताबिक कार्रवाई होगी।
- डॉ. प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ