बदायूं/उझानी। अगेती आलू की खेती इस बार किसानों के लिए अच्छे दिनों का अहसास नहीं करवा पाई। मौसम ने साथ दिया तो पैदावार भी अच्छी हुई लेकिन माल थोक बाजार में पहुंचते ही रेट ने गणित बिगाड़ दिया। चार सौ रुपये प्रति कुंतल से अधिक के खरीदार ढूंढे नहीं मिल पा रहे हैं। पिछले साल तो अगेती आलू पांच सौ रुपये प्रति कुंतल पार कर गया था। लागत और मेहनत को मिलाकर देखें तो किसानों की जेब खाली ही रह गई है।
थोक से लेकर फुटकर मार्केट में इन दिनों अगेती (कच्चे) आलू की भरमार है। दरअसल, इस बार मौसम आलू के लिए मुफीद रहा। शुरू के दिनों में झुलसा रोग फैलने की आशंका बढ़ी लेकिन तब तक अगेती आलू की फसल मार्केट में आने लग गई। जानकारों की मानें तो कच्चे आलू के मार्केट में खरीददार सीमित हैं। थोक के व्यापारी कच्चे आलू को खपत के अनुरूप ही खरीदते हैं, क्योंकि ऐसे आलू का भंडारण नहीं किया जा सकता। एक अनुमान के अनुसार, कच्चे आलू की पैदावार प्रति बीघा करीब 18 से 20 कुंतल है, जबकि लागत प्रति बीघा आठ-नौ हजार रुपये आई है। लागत के मुकाबले आमदनी कम रही। इसमें किसानों की मेहनत को जोड़ देें तो किसानों के लिए घाटा ही रहा। बंपर पैदावार के अनुरूप किसानों को रेट पिछले साल की तरह मिल जाता तो भी नुकसान नहीं होता। थोक व्यापारी दीपक शर्मा कहते हैं कि पिछले साल तो कच्चे आलू का रेट प्रति कुंतल पांच सौ रुपये पार कर गया था। इधर, कच्चा आलू फुटकर मार्केट में सात रुपया प्रति किलो बिक रहा है। सबसे ज्यादा फायदे में फुटकर विक्रेता हैं।
शीतगृहों में पुराने आलू की मात्रा काफी कम
उझानी। शीतगृहों में आलू का भंडारण काफी मात्रा में हुआ था। बोआई और मार्केट में खपत के बाद शीतगृहों में अब कोई खास आलू नहीं बचा है। जो बचा है, वह व्यापारियों का है। मार्केट में उसके रेट करीब आठ-नौ सौ रुपये प्रति कुंतल हैं। फुटकर में वह 12 रुपया प्रति किलो बिक रहा है। थोक व्यापारियों को पुराना आलू आगरा, टूंडला और फर्रुखाबाद के शीतगृहों से मंगाना पड़ रहा है।
यह कहते हैं उत्पादक-
उम्मीद थी कि मिलेगा अच्छा रेट
अगेती आलू उत्पादक इब्ले हसन ने बताया कि कच्चे आलू की खेती हर साल एक जैसी नहीं होती। इस बार पैदावार बंपर हुई है। रेट अच्छा मिलने की उम्मीद भी रही लेकिन घाटा हो गया है।
सरकार तय करे कच्चे आलू के रेट
गद्दीटोला मोहल्ले के लालता प्रसाद का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार को फसलों का समर्थन मूल्य तय करना चाहिए। फसल अगेती है तो उसे भी समर्थन मूल्य के अनुरूप मार्केट में खरीदा जाए। तभी किसानों को फायदा होगा।
आलू की खेती से हो गया नुकसान
आलू उत्पादक राशिद ने बताया कि कच्चे आलू की खेती में उत्पादकों को करीब एक हजार रुपये प्रति बीघा का नुकसान हुआ है। नुकसान को सिर्फ इसलिए सहन कर लिया गया है कि खाली पड़े खेतों में पिछेती गेहूं की फसल हो जाएगी।
अगेती आलू की पैदावार बंपर होने की दो वजह हैं। एक तो यह कि अभी तक ज्यादा पाला नहीं पड़ा है दूसरा यह कि मौसम ने पूरा साथ दिया। फसल में रोग भी नहीं लगा। किसानों ने भी देखभाल अच्छी तरह से की है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।