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दो माह से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं, मरीज भगवानभरोसे
जिले के स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल से रोजाना लौट रहे लोग अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल से करीब दो माह से एंटी रैबीज वैक्सीन नदारद है। मरीजों ने अब स्वास्थ्य विभाग पर भरोसा छोड़ दिया है, नए मरीजों को इसकी जानकारी नहीं है। वह लगातार जिला अस्पताल और जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। यहां आने पर उन्हें वही रटा रटाया जवाब मिल रहा है कि वैक्सीन नहीं आई है।
जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में 17 अगस्त को एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म हुई थी। उससे एक दिन पहले यानि 16 अगस्त को कुत्ता-बंदर काटे मरीजों को वैक्सीन लगाई गई थी। जिला अस्पताल प्रशासन ने उससे पहले ही रिमाइंडर भेजा था। परंतु 16 अगस्त को वैक्सीन खत्म होने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन का ऐसा अकाल पड़ा कि उसके बाद न तो वैक्सीन आई और न ही स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया। 17 अगस्त को ओपीडी के कमरा नंबर 18 के बाहर एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं होने का नोटिस चस्पा कर दिया गया। करीब पंद्रह दिन तक मरीजों की ऐसी लाइन लगी कि भीड़ संभाले नहीं संभली। यहां के स्टाफ को बेहद मुसीबत झेलनी पड़ी। कई तरह के आरोप भी लगे और विवाद होते-होते भी बचे। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली। आखिरकार वही हुआ, मरीजों का स्वास्थ्य विभाग से भरोसा ही टूट गया। जो मरीज पंद्रह दिन से भटक रहे थे। उन्होंने धीरे-धीरे आना बंद कर दिया। उन्होंने मेडिकल स्टोरों से एंटी रैबीज वैक्सीन खरीदकर लगवाने शुरू कर दिए।
इधर, जिले में कुत्ता-बंदर लगातार लोगों को निशाना बना रहे हैं। लोगों को काट रहे हैं, उनको घायल कर रहे हैं। लोग जिला अस्पताल या जिले के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं पर हाथ निराशा ही लगती है।
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बेटा!..मुझ पर 10 रुपये हैं, कैसे खरीदूं वैक्सीन
-सोमवार को जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए करीब 60 वर्षीय महिला मिथलेश पहुंचीं थीं। उन्होंने ओपीडी के कमरा नंबर 18 में जाकर बताया कि उन्हें तीन दिन पहले कुत्ते ने काटा था। उन्हें उम्मीद थी कि अस्पताल में उनके एंटी रैबीज वैक्सीन लग जाएगी। जब उन्हें बताया कि यहां तो वैक्सीन आ ही नहीं रही है। किसी मेडिकल से खरीद लो और लगवा लो। उस महिला ने बताया कि वह सालारपुर ब्लाक के कुआंडांडा कासिमपुर निवासी हैं। उनके पास बीस रुपये थे। दस रुपये एक तरफ के दे आईं और अब उनके पास दस रुपये बचे हैं। वैक्सीन खरीदने के लिए उनके पास रुपये नहीं हैं।
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दिव्यांग को बैरंग लौटना पड़ा
अलापुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुंडेली निवासी जसवीर का आठ वर्षीय बेटा हिमांशु दिव्यांग है। दो दिन पहले उसे कुत्ते ने काटा था। बीच में रविवार आ गया। सोमवार दोपहर जसवीर अपने बेटे हिमांशु को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने के लिए काफी मिन्नतें की। बेटे की दिव्यांगता का हवाला भी दिया परंतु उन्हें निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
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एंटी रैबीज वैक्सीन पहले दो कंपनी से आती थीं। अब उन्होंने इसके रेट बढ़ा दिए हैं। एक कंपनी ने वैक्सीन देना बंद कर दी है। जबकि दूसरी कंपनी रेट पर अड़ी है। उसे बार-बार रिमाइंडर भेज रहे हैं। इसके बावजूद वैक्सीन नहीं आ रही है। यह हाल सिर्फ यहां का ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश का है। ऐसे में हम क्या कर सकते हैं।
-डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस, जिला अस्पताल