बदायूं। अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ डॉ.कपिला राघव ने गैरइरातन हत्या में नामजद चार मुल्जिमों को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की कड़ी कैद और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह घटना थाना उसहैत क्षेत्र के गांव लिलवां में 12 मार्च 2011 को घटी थी।
लिलवां गांव निवासी रोशन पुत्र डोरीलाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक रोशन की बहन गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी। रोशन के बहनोई राजाराम ने अपने घर का पानी निकालने को नाली बनाई थी। इसी पर पड़ोसी महावीर, अहिवरन पुत्र रामनिवास और गंगाराम, नन्हे पुत्र रामभजन ने इसका विरोध किया। विवाद होने पर चारों ने वादी की बहन सोमवती, बहनोई राजाराम आदि को लाठी-डंडों से जमकर पीटा। इसमें राजाराम को गंभीर चोटें आईं। बाद में राजाराम की इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई।
पुलिस ने महावीर, गंगाराम, अहिवरन और नन्हे के खिलाफ गैरइरातन हत्या में आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजे चतुर्थ डॉ.कपिला राघव ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद गैरइरातन हत्या में नामजद महावीर, गंगाराम,अहिवरन और नन्हे को दोषी मानते हुए सात-सात साल की कड़ी कैद के अलावा सभी पर पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने डालते हुए सजा सुनाई।