बिसौली (बदायूं)। पटाखा फैक्ट्री में आग लगने के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। इसमें पुलिस की लापरवाही सामने आई है। अगर पुलिस सक्रिय होती तो फैक्ट्री मालिक सुबूतों पर ‘झाड़ू’ नहीं फेर पाता और न ही हादसे के कारणों को छिपाता।
जानकारों की माने तो बारूद से जिस जगह पर आग लगी, वो स्थान खुले में था। ठीक उसके पीछे पटाखों का गोदाम था। अगर आग कहीं गोदाम के अंदर लगी होती तो शायद दूसरा रसूलपुर कांड हो जाता। इस हादसे के बाद पुलिस को तुरंत मामले की जांच करनी चाहिए थी लेकिन पुलिस गांव नहीं पहुंची और न ही मामले की जांच की। दूसरे दिन जब तक पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, तब तक घटनास्थल पर झाड़ू लगा दी गई थी। जो बारूद, राख और पटाखों के कागज थे वे एकत्र कर फेंक दिए गए थे, जबकि पुलिस का कहना था कि बारूद की रगड़ से आग लगी थी। अगर पुलिस की उदासीनता नहीं होती तो शायद फैक्ट्री मालिक से पूछताछ शुरू हो जाती है और वह घटना की मुख्य वजह भी बताता।
सीओ सर्वेंद्र सिंह ने कहा था कि पटाखा फैक्ट्री मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी, जो अब तक नहीं हुई है। पुलिस अभी यह भी पता नहीं लगा पाई है कि लाइसेंस धारक के पास कितना बारूद था। उसकी भंडारण क्षमता कितनी थी। इस हादसे में चार लोग घायल थे, लेकिन पुलिस ने सिर्फ तीन लोगों को घायल माना है। बच्चे को पुलिस घायल ही नहीं मान रही है। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस भी मामले में लीपापोती करने में जुटी है।