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खतरे के निशान के नजदीक पहुंची रामगंगा, बाढ़ से 50 गांव टापू बने

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गांव छोड़कर जीएम बांध पर पहुंचने लगे ग्रामीण
चार गांव में भरा बाढ़ का पानी, दो बाढ़ के पानी से घिरे
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं/सहसवान। मंगलवार को नरौरा बैैराज, बिजनौर और हरिद्वार से ज्यादा पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। सहसवान में बांध के उस पार बसे चार गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है और दो गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। संपर्क मार्ग कटने के चलते ग्रामीण नाव से आ जा रहे हैं। कुछ लोगों ने गांव छोड़ जीएम बांध पर पहुंचना शुरू कर दिया है। तहसीलदार ने राजस्व टीम के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। ग्रामीणों से सुरक्षित स्थानों पर आने की अपील की। उसहैत क्षेत्र के गांव जटा और बछौरा में पानी घुसने लगा है।
मंगलवार को नरौरा से गंगा में दो लाख 483 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके चलते गंगा में उफान आ गया। बढ़ता हुआ बाढ़ का पानी गंगा महावा बांध से आ लगा। साथ ही जीएम बांध के उस पार बसे खागी नगला, भमरौलिया, वीर सहाय नगला, परशुराम नगला में बाढ़ का पानी भर गया। इन गांवों के संपर्क मार्ग कट गए। तौफी नगला, तेलिया नगला बाढ़ के पानी से घिर गए है, लेकिन अभी गांव में पानी नहीं भरा है। रिसाव के चलते तहसील प्रशासन द्वारा जीएम बांध के इस पार बसाए गए गांव परौटी में पानी भर गया है।
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किसानों की हजारों बीघा मक्का, बाजरा, उड़द, तिल आदि की फसलें जलमग्न हो गई हैं। यदि जलभराव की स्थिति अधिक समय तक रहती है तो फसलों के नष्ट होेने का खतरा बढ़ जाएगा। अभी एक-दो दिन जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि बिजनौर से एक लाख 47 हजार 485 और हरिद्वार से 72 हजार 397 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। तहसीलदार राधेश्याम शर्मा ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों से और पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। उनका कहना था कि ग्रामीणों के बाहर आने पर उनके लिए सुरक्षित स्थानों पर रहने की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल आवागमन के लिए नावें डलवा दी गई है। कुछ ग्रामीण अपने पशुओं को जीएम बांध पर ले आए है। बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों को बुधवार को तिरपाल वितरित किए जाएंगे। गांव धापड के पास जीएम बांध पर भी लहरों का दवाब बना हुआ है।
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बाढ़ चौकी बनाकर भूला प्रशासन, नाव तक की व्यवस्था नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज (बदायूं)। दातागंज क्षेत्र में जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ चौकी हजरतपुर और नगरिया खननू बनाई गई, लेकिन इन बाढ़ चौकी बनने से ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं हुआ। जबकि प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि प्रत्येक बाढ़ चौकी पर हर विभाग के कर्मचारी तैनात रहेंगे, जो ग्रामीणों केे अपने-अपने विभाग की अनुसार सुविधाएं देंगे। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर एक नाव और दो गोताखोर रहेंगे। लेकिन अब तक किसी भी बाढ़ चौकी पर कोई नाव की व्यवस्था नहीं कराई गई है।
गढ़िया रंगीन मार्ग पर पानी भर जाने से कारण आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। बहाव तेज होने के कारण कोई भी व्यक्ति उधर से निकल नहीं पा रहा है। वहीं प्रशासन की ओर से नाव की भी व्यवस्था नहीं की गई है। इसका कुछ लोगों ने फायदा उठाते हुए ट्रैक्टर के बड़े ट्यूवों को बांधकर जुगाड़ से नाव बनाई है। उन लोगों ने एक तरफ से दूूसरी और एक बार जाने के लिए एक हजार रुपये ले रहे हैं। ---------
उर्द और बाजरे की फसल हुई नष्ट
स्थानीय कृषकों ने क्षेत्र में सैकड़ों बीघा उर्द और बाजरे की फसल की थी जो अब जलमग्न हो चुकी है। कृषकों का कहना है कि अब यह फसल अब पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। ऐसे में किसानों को दोहरी आर्थिक क्षति हुई है।
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दो पुल बाढ़ में डूबे
रामगंगा के जल में हो रही बढ़ोतरी की वजह से बक्सेना और कुनिया के बीच में बने पुल के ऊपर तक पानी बह रहा है। जबकि देवचरी और गाढ़िया शाहपुर के बीच में बने पुल के ऊपर तकरीबन दो मीटर पानी बह रहा है।
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सैकड़ों गांवों में पशुओं को हुआ चारे का संकट
सबसे बड़ी दिक्कत पशुओं के चारे को लेकर आ रही है। क्योंकि हर तरफ पानी भर जाने की वजह से कहीं पर भी घास नहीं रही है। ऐसे में पशुओं को क्या खिलाएंगे यह सबसे बड़ी समस्या है।
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