सरकार ने भले ही रविवार से 50 माइक्रॉन तक के पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया हो लेकिन बदायूं में सोमवार को भी रोक का कोई असर नजर नहीं आया। बाजार में पॉलिथीन में ही दुकानदारों ने ग्राहकों को वस्तुएं रखकर दीं।
कई साल से पॉलिथीन के खिलाफ चल रही मुहिम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रफ्तार दी है। सो उन्होंने 15 जुलाई से सूबे में पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। पहले दिन शहर के अंदर प्रशासन, व्यापारियों, चेयरमैन ने जागरूकता रैली निकाली। लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे अब पॉलिथीन का कतई प्रयोग नहीं करें। समाज के अंदर नासूर बन चुकी पॉलिथीन से हो रहे नुकसान के बारे भी बताया गया। शासन चाहता है कि प्रतिबंधित पॉलिथीन अब कहीं नजर नहीं आए। इसके लिए शासन ने आदेश जारी किए थे कि सोमवार से पॉलिथीन के भंडारण, निर्माण और वितरण के खिलाफ सघन छापामार कार्रवाई हो। कड़ाई से इसे रोकने को शासन अध्यादेश भी लायी है जिसके तहत प्रयोग करने वाले को जेल हो सकती है या फिर उस पर आर्थिक दंड भी पड़ सकता है। शासन के सख्त आदेश के बाद भी बदायूं शहर के साथ ही जिले भर में पॉलिथीन के प्रतिबंध का कोई खास असर नहीं दिखाई दिया। न ही प्रशासन और न नगर निकायों ने किसी तरह छापामार कार्रवाई की। आज जिस तरह प्रशासन खामोश रहा है उससे यहीं स्पष्ट हो रहा था जैसे उसे सिर्फ प्रतिबंध पर पहले दिन ही काम करना था।
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मार्केट गवाह है...रोके नहीं रुक रहा पॉलिथीन का इस्तेमाल
इसे प्रशासन की सुस्ती कहें तो गलत न होगा कि शासन भले ही पॉलिथीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के प्रति बेहद गंभीर हो, लेकिन प्रशासन की सेहत पर उसका कोई असर नहीं दिख रहा। शायद सही वजह रही कि मार्केट में न दुकानदारों को और न ही ग्राहकों पर पॉलिथीन पर लगे प्रतिबंध का खौफ है। वह रोजाना की तरह ही पॉलिथीन की थैली में ग्राहकों को सौदा दे रहे हैं। हालांकि कुछ जागरूक लोग खासकर महिलाएं जरूर हाथ में थैला लिए दिखीं।