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सोमवती अमावस्या पर कछला में उमड़ा आस्था का सैलाब

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गंगा में डुबकी लगाते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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उझानी (बदायूं)। सोमवती अमावस्या पर सोमवार को कछला गंगाघाट आस्था से सराबोर हो उठा। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुुुओं ने जीवनदायिनी गंगा में डुबकी लगाकर घाट पर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं में सर्वाधिक संख्या राजस्थान के महिला-पुरुषों की रही। उन्होंने अपने रीति और रिवाज से धार्मिक अनुष्ठान भी कराए।
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कछला गंगाघाट पर तड़के से उमड़े श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान यूं तो ब्रह्ममुहुर्त में शुरू कर दिया, लेकिन सर्वाधिक भीड़ दोपहर में नजर आई। गंगा स्नान के दौरान ही श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सूर्यदेव को अर्क देकर उन्हें नमन किया। घाट पर पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोज कराया। साधु और संतों को दक्षिणा भी भेंट की गई। हालांकि श्रद्धालुओं की भीड़ गंगाघाट के दोनों छोर पर रही लेकिन कासगंज वाले छोर पर राजस्थान के श्रद्धालुओं की सर्वाधिक संख्या पहुंचने की वजह से घाट पर बदइंतजामी का माहौल भी पैदा हो गया। यहां तक कि महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए साड़ियों की आड़ लेनी पड़ी। कई महिलाएं तो खुले आसमान के नीचे ही कपड़े बदलने को मजबूर हो गईं।
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कासगंज वाले छोर पर घंटों लगा रहा जाम
उझानी। कछला गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की संख्या में सुबह से ही इजाफा होने से करीब 10 बजे पुल के पास आसपास वाहन फंसने शुरू हो गए। करीब आधा घंटा में ही पुल से लेकर कासगंज जिले के छोर वाली पुलिस चौकी तक जाम लग गया। जाम की वजह से वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम की वजह से बरेली, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ की ओर आने-जाने वाले वाहन सवार लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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आठ श्रद्धालुुओं के पर्स उड़ाए, महिला की चेन गायब
उझानी (बदायूं)। सोमवती अमावस्या पर सोमवार को श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा दिक्कत चोर-उचक्कों की सक्रियता से हुई। चोरों ने घाट पर ही आठ श्रद्धालुओं के कपड़ों को खंगाल लिया। इनमें कइयों की जेब में धेला भी नहीं बच पाया। भीड़ में भरतपुर की एक महिला के गले से सोने की चेन गायब हो गई।
गंगाघाट पर चोर-उचक्कों की शिकार बनी महिला सोनवती पत्नी प्रेमशंकर राजस्थान में भरतपुर की निवासी है। वह अपने भतीजे के साथ गंगा स्नान को पहुंची थी। गंगा नहाकर वह भतीजे के साथ पुल की ओर बढ़ी उसे गले में सोने की चेन नजर नहीं आई। वह लौटकर घाट पर भी पहुंची लेकिन चेन का सुराग नहीं लग पाया। सोने की चेन गायब होने से महिला काफी देर तक घाट पर ही भटकती रही। इसके अलावा श्रद्धालुओं में दिल्ली के राजाराम की पेंट से 1200 रुपये, राजस्थान के भरतपुर जिले में पाडक सिकंदरपुर निवासी धर्मेंद्र की पेंट से पर्स में रखे 900 रुपये, मध्यप्रदेश के भिंड जिले के कस्बा गोहट निवासी हरीसिंह की जेब से बंदूक का लाइसेंस, ढाई हजार रुपये। मुरैना (मध्यप्रदेश) के लोकेंद्र तोमर की पेंट गायब हो गई। पेंट की जेब में 800 रुपये और एटीएम कार्ड रखा था। राजस्थान में हिंडौन निवासी रामेश्वर दयाल और भरतपुर के अतरसिंह के कपड़े घाट पर पड़े मिल गए लेकिन उनकी जेबों में रखे रुपये गायब थे। चोर-उचक्कों का शिकार बने श्रद्धालुओं में दो-तीन लोगों ने घाट पर मौजूद पुलिस कर्मियों से शिकायत भी की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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राजस्व कर्मियों ने परिजनों से मिलाए भटके पांच बच्चे
उझानी। गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ की वजह से चार-पांच बच्चे अपनों से बिछड़ गए। चूंकि घाट पर ही राजस्व विभाग के कर्मचारियों का कैंप कार्यालय था, सो दो बच्चों को श्रद्धालुओं ने कैंप में पहुंचा दिया। लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र ने बच्चों के हुलिया का लाउडस्पीकर से ऐलान किया तो उनके घरवाले भी पहुंच गए। लेखपाल ने बताया कि पांच बच्चों को उनके घरवालों से मिला दिया गया। इनमें तीन बच्चे राजस्थान के थे।
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